सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छग पुलिस ने बदली गुमशुदगी की व्यवस्था, होगा FIR

प्रेम कुमार रायपुर: रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में गुमशुदगी के मामलों को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली बदल गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब किसी महिला, पुरुष, बालिग या नाबालिग के लापता होने की सूचना मिलने पर मामला केवल ‘गुम इंसान’ की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस को परिस्थितियों के अनुसार तत्काल FIR दर्ज कर जांच शुरू करनी होगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश में 14 दिनों के भीतर 60 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि रायपुर में 16 FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
गुमशुदगी की शिकायत मिलते ही FIR की तैयारी
पहले कई मामलों में पुलिस गुम इंसान की कायमी कर व्यक्ति की तलाश तक कार्रवाई सीमित रखती थी। अब व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। गुमशुदगी के पीछे अपहरण, मानव तस्करी या किसी अन्य अपराध की आशंका होने पर पुलिस को FIR दर्ज कर विधिवत विवेचना करनी होगी।
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बालिग गायब हुआ तो भी पुलिस करेगी केस दर्ज
नाबालिग के लापता होने पर पहले से ही अपहरण की धाराओं में मामला दर्ज किया जाता रहा है। नई व्यवस्था में बालिग के गुम होने की स्थिति में भी परिस्थितियों के आधार पर संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर जांच की जा रही है।
CCTV से मोबाइल लोकेशन तक होगी जांच
FIR दर्ज होने के बाद गुम व्यक्ति की तलाश के साथ पुलिस के सामने कानूनी जांच की जिम्मेदारी भी होगी। जांच में CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंकिंग लेनदेन और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाला जा सकता है। संदिग्ध लोगों से पूछताछ और संभावित ठिकानों की जांच भी विवेचना का हिस्सा होगी।
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रायपुर के कई थानों में दर्ज हुए केस
पुलिस कमिश्नरी क्षेत्र में भी गुमशुदगी के मामलों को केवल मिसिंग पर्सन रिपोर्ट तक सीमित रखने की पुरानी प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। डीडी नगर, कोतवाली, राजेंद्र नगर सहित कई थानों में मामलों में धारा 140(3) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान
अधिवक्ता विपिन अग्रवाल के मुताबिक, नाबालिगों के लापता होने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत अपहरण का प्रकरण दर्ज किया जाता है। वहीं गुमशुदगी से जुड़े मामलों में परिस्थितियों के अनुसार धारा 140(3) के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस अपराध में सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की जवाबदेही तय की
सुप्रीम कोर्ट ने जी. गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में लापता व्यक्ति की सूचना मिलने पर पुलिस को तत्काल FIR दर्ज कर जांच में देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। लापता बच्चों के मामलों में अपहरण और मानव तस्करी की आशंका को देखते हुए पुलिस की जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया गया है।
इससे पहले बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत सरकार मामले में वर्ष 2012 में भी लापता बच्चों के मामलों में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
छत्तीसगढ़ में एक लाख से ज्यादा लोग हुए लापता
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 से जून 2026 तक छत्तीसगढ़ में 1,03,766 लोगों के गुम होने की शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 87,035 लोगों को तलाश लिया गया, जबकि 16,731 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। रायपुर में इसी अवधि में 15,632 गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें 3 हजार से ज्यादा लोगों की तलाश अभी जारी है।
पुलिस ने तलाश के लिए टीमें लगाईं
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गुम इंसान की शिकायत पर केस दर्ज किया जा रहा है। गुम व्यक्ति की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगाई जा रही हैं और मामलों की जांच भी की जा रही है।
तीन दिन से गायब युवक, खारुन किनारे मिली बाइक और बैग
नई व्यवस्था के बीच रायपुर के उरला इलाके से एक युवक के लापता होने का मामला सामने आया है। बंजारी नगर निवासी अभिषेक मेहता (25) उरला स्थित भाग्य लक्ष्मी ट्रांसपोर्ट में काम करता है। अभिषेक सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे रोज की तरह ड्यूटी के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने देर रात तक उसके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
खारुन नदी किनारे मिले सामान से बढ़ी चिंता
मंगलवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि खारुन नदी के किनारे अभिषेक की बाइक और बैग मिला है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों सामान बरामद कर लिए हैं। युवक की तलाश जारी है। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब युवक के आने-जाने के रास्ते, मोबाइल लोकेशन, आसपास के CCTV और उससे जुड़े संभावित लोगों की जानकारी जुटा रही है।














