CG NEWS: 34 साल पुराने FIR मामले में हाईकोर्ट सख्त: तीन DSP पर कार्रवाई का हिसाब मांगा, DGP को शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश

RAIPUR/BILASPUR NEWS। 34 साल पुराने एफआईआर मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने तीन डीएसपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीजीपी से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं याचिकाकर्ता को पुलिस द्वारा पेश की गई चार्जशीट को कानून के तहत चुनौती देने की अनुमति भी दे दी गई है।
34 साल पुराने केस में हाईकोर्ट की सख्ती
वर्ष 1992 में दर्ज एफआईआर से जुड़े मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने डीजीपी को निर्देश दिया कि तीन डीएसपी के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की वर्तमान स्थिति शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की गई है।
पहले भी मांगी गई थी कार्रवाई की रिपोर्ट
कोर्ट ने इससे पहले 17 जून 2026 को डीजीपी से संबंधित अधिकारियों पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि डीजीपी ने 12 जून 2026 को राज्य सरकार को अनुशंसा भेजी थी। इस अनुशंसा में तीन दोषी पाए गए डीएसपी के खिलाफ लघु दंड लगाने की सिफारिश की गई है। फिलहाल यह प्रस्ताव गृह विभाग के विचाराधीन है।
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चार्जशीट को चुनौती देने की मिली कानूनी छूट
याचिकाकर्ता मनोहरलाल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जब उन्होंने एफआईआर रद्द करने की याचिका दायर की थी, तब जांच जारी थी। लेकिन अब पुलिस ने जांच पूरी कर उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार इस चार्जशीट को अलग से चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं।
DGP को देना होगा अंतिम कार्रवाई का ब्यौरा
डिवीजन बेंच ने डीजीपी को नया शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि 12 जून 2026 की अनुशंसा के बाद तीनों डीएसपी के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक क्या अंतिम कार्रवाई की है। कोर्ट इस मामले में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर स्पष्ट स्थिति चाहती है।
15 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि राज्य सरकार तीन डीएसपी के खिलाफ क्या निर्णय लेती है। 15 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में डीजीपी का शपथ पत्र और सरकार की कार्रवाई कोर्ट के सामने होगी, जिससे इस लंबे समय से लंबित मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है।












