छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच सियासी हलचल तेज, मोहन भागवत से मिले BJP के दिग्गज नेता

रायपुर: छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के बिलासपुर प्रवास ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। संघ की संगठनात्मक बैठकों के दौरान भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की भागवत से मुलाकात चर्चा का केंद्र रही। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक विस्तार और प्रांत विभाजन का अंतिम फैसला अब राष्ट्रीय स्तर की बैठक में होने की बात सामने आई है।
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भागवत के दौरे से बढ़ी सियासी हलचल, BJP नेताओं की मुलाकात चर्चा में
डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे थे। इस दौरान कोनी स्थित सरस्वती शिक्षा ज्ञान संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित किया और संगठनात्मक कार्यों में सजगता, अनुशासन तथा सक्रियता बनाए रखने की नसीहत दी। दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को उन्होंने संघ के प्रांत पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें छत्तीसगढ़ में संगठन के विस्तार, प्रांत स्तर की जिम्मेदारियों और विभागों के पुनर्गठन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी बीच भाजपा नेताओं की उनसे मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।

छत्तीसगढ़ RSS के दो हिस्सों में बंटने पर मंथन, राष्ट्रीय बैठक पर नजर
संघ से जुड़े लोगों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक विस्तार के तहत प्रांत को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव चर्चा में है। शुक्रवार की बैठक में इस विषय पर प्रारंभिक विचार-विमर्श हुआ। रायपुर और बिलासपुर को अलग-अलग विभागीय केंद्र बनाने पर सहमति बनने की बात भी सामने आई है। हालांकि, प्रांत विभाजन की औपचारिक घोषणा और अंतिम निर्णय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में आगे अखिल भारतीय स्तर की बैठक में विचार किया जाएगा। संगठनात्मक पुनर्गठन का उद्देश्य प्रदेश में संघ की गतिविधियों का बेहतर संचालन और विस्तार माना जा रहा है।
बंद कमरे में कर्मवीर सिंह की भागवत से मुलाकात, क्या हुई चर्चा?
भागवत के बिलासपुर प्रवास के दौरान भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह भी उनसे मिलने पहुंचे। दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि, इस मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा या चर्चा का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन से जुड़े संभावित बदलावों की चर्चाओं के बीच इस मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, बातचीत में सरकार, मंत्रिमंडल या संगठनात्मक नियुक्तियों से जुड़े मुद्दे उठे या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
धरमलाल कौशिक से अमर अग्रवाल तक, कई वरिष्ठ नेताओं ने की मुलाकात
संघ प्रमुख के प्रवास के दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनसे मुलाकात की। इनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल, विधायक सुशांत शुक्ला और रजनीश सिंह सहित संभाग के संघ पदाधिकारी शामिल बताए गए हैं। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जारी अटकलों के बीच इन मुलाकातों ने राजनीतिक चर्चाओं को नया आधार दिया है। हालांकि, इन मुलाकातों को किसी संभावित नियुक्ति या सत्ता में बदलाव से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मंत्रियों की गैरमौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय
भागवत के दौरे के दौरान भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बीच सरकार से जुड़े कई नेताओं और मंत्रियों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, संघ की संगठनात्मक बैठकों और भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों के बीच अंतर को भी ध्यान में रखना जरूरी है। संघ की बैठकों का एजेंडा और भाजपा नेताओं के साथ हुई बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं होने के कारण इन मुलाकातों के राजनीतिक निहितार्थों पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
अब दो बड़े सवालों पर टिकी नजरें
मोहन भागवत के बिलासपुर प्रवास के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति और संघ के संगठनात्मक ढांचे को लेकर दो मुद्दे चर्चा में हैं। पहला, क्या प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार या भाजपा संगठन में बदलाव को लेकर कोई नया घटनाक्रम सामने आएगा? दूसरा, क्या राष्ट्रीय बैठक में छत्तीसगढ़ RSS के प्रांत विभाजन को अंतिम मंजूरी मिलेगी? फिलहाल, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। वहीं, संघ के प्रांत विभाजन पर भी अंतिम निर्णय की पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में आने वाली राष्ट्रीय बैठक और प्रदेश भाजपा के अगले कदमों पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
नोट: मंत्रिमंडल विस्तार और RSS प्रांत विभाजन को लेकर खबर में अटकलों तथा अपुष्ट जानकारियों को तथ्य की तरह प्रस्तुत नहीं किया गया है। प्रकाशित करने से पहले राष्ट्रीय बैठक की तारीख, रायपुर-बिलासपुर विभागों पर सहमति और संबंधित नेताओं की मुलाकात की पुष्टि कर लें।




















