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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 26 सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई, जंगल की सुरक्षा पर उठे सवाल

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बागड़ा बफर क्षेत्र में 26 सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई के साक्ष्य मिले हैं। मानसून के दौरान हुई इस घटना के बाद जंगल की सुरक्षा और गश्ती व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वनरक्षक और डिप्टी रेंजर से आर्थिक क्षति की वसूली का प्रस्ताव भेजा गया है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 26 सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई, जंगल की सुरक्षा पर उठे सवाल

सोहागपुर। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के बागड़ा बफर क्षेत्र में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में बाघ विचरण क्षेत्र में 26 पेड़ों की कटाई के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि मानसून के दौरान जंगल में पेड़ों को काटा गया, जबकि इस दौरान सुरक्षा और नियमित गश्ती के पुख्ता इंतजाम होने के दावे किए गए थे। अब मामले में तत्कालीन वनरक्षक और संबंधित डिप्टी रेंजर से आर्थिक क्षति की वसूली का प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

सुरक्षा के दावों के बीच जंगल में होती रही कटाई

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने मानसून से पहले कोर और बफर क्षेत्र के जंगलों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाने की बात कही थी। मानसून के दौरान जंगलों में नियमित गश्ती और वन संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी अधिकारियों से लेकर मैदानी कर्मचारियों तक की थी। इसके बावजूद बागड़ा बफर के घने जंगल में अवैध कटाई के साक्ष्य मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जांच के दौरान कुछ स्थानों पर काटे गए पेड़ों की लकड़ियां जंगल के भीतर छिपाकर रखे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे नियमित गश्ती और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह पता लगाना भी जरूरी है कि तस्कर जंगल के संवेदनशील क्षेत्र तक कैसे पहुंचे और लंबे समय तक अवैध गतिविधियां कैसे चलती रहीं।

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नए वनरक्षक की सूचना के बाद सामने आया मामला

जानकारी के अनुसार, संबंधित बीट के वनरक्षक बलवंत सिंह राजपूत के स्थानांतरण के बाद नए कर्मचारी ने कार्यभार संभाला। इसके बाद जंगल में पेड़ों की अवैध कटाई की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई। बताया गया है कि 4 अक्टूबर को अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई थी। हालांकि, सूचना मिलने के बाद बागड़ा बफर रेंज के स्तर पर तत्काल कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पेड़ों की कटाई किसने की, तस्कर जंगल के भीतर कैसे पहुंचे और लकड़ी को बाहर ले जाने के लिए किन रास्तों का इस्तेमाल किया गया, इन बिंदुओं पर जांच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

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26 पेड़ों की कटाई, 30 से 35 हजार रुपये की क्षति का आकलन

प्रारंभिक जांच में बागड़ा बफर क्षेत्र की पूर्व रानीपुर बीट के कंपार्टमेंट नंबर 230 सहित अन्य स्थानों पर सागौन के 26 पेड़ों की अवैध कटाई के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। जांच के दौरान कुछ जगहों पर काटे गए पेड़ों की लकड़ियां भी मिली हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस कटाई से करीब 30 से 35 हजार रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। इसी आधार पर तत्कालीन वनरक्षक बलवंत सिंह राजपूत और संबंधित डिप्टी रेंजर से नुकसान की राशि वसूलने का प्रस्ताव तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेजा गया है। हालांकि, केवल आर्थिक क्षति की वसूली से मामला खत्म नहीं होता। जंगल में अवैध कटाई करने वालों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित चूक की जांच भी जरूरी है।

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मैदानी कर्मचारियों पर कार्रवाई, वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल

इस मामले में प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर वन विभाग की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल वनरक्षक या डिप्टी रेंजर तक सीमित नहीं होती। निगरानी और प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सवाल है कि मानसून के दौरान सुरक्षा के दावों के बावजूद संवेदनशील क्षेत्र में पेड़ों की कटाई कैसे हुई? नियमित गश्ती की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी? सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या सुरक्षा व्यवस्था में संभावित लापरवाही के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी? बताया जा रहा है कि सामान्य वन मंडल में करीब डेढ़ साल पहले अवैध कटाई के एक अन्य मामले में डीएफओ स्तर के अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी। ऐसे में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के इस मामले में भी सभी संबंधित स्तरों पर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।

जांच प्रतिवेदन उपसंचालक कार्यालय भेजा

सहायक संचालक शिव प्रसाद मैथानी, सोहागपुर ने बताया कि बागड़ा बफर में अवैध रूप से पेड़ काटे जाने की जांच का प्रतिवेदन उपसंचालक कार्यालय भेज दिया गया है। जांच में करीब 26 पेड़ों की कटाई के साक्ष्य मिले हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में डिप्टी रेंजर और वनरक्षक से आर्थिक क्षति की वसूली का प्रस्ताव दिया गया है। वरिष्ठ कार्यालय इस संबंध में उचित निर्णय लेकर आगे की कार्रवाई करेगा। अब देखना होगा कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन इस मामले में केवल मैदानी कर्मचारियों से आर्थिक क्षति की वसूली करता है या जंगल की सुरक्षा में संभावित चूक की व्यापक जांच कर अन्य जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय करता है।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...

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