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RSS Vijayadashami Utsav 2026: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में किया शस्त्र पूजन, बोले- आजादी के समय से भी ज्यादा तप की जरूरत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का विजयादशमी उत्सव नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में मनाया गया। इस दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज देश को आजादी के समय से भी ज्यादा तप करने की जरूरत है। उन्होंने देश की एकता, समाज के प्रति जिम्मेदारी, त्याग और संयमपूर्ण जीवन के महत्व पर भी जोर दिया।
RSS Vijayadashami Utsav 2026: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में किया शस्त्र पूजन, बोले- आजादी के समय से भी ज्यादा तप की जरूरत
नागपुर RSS मुख्यालय में मोहन भागवत ने किया शस्त्र पूजन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने महाराष्ट्र के नागपुर में विजयादशमी उत्सव मनाया। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और स्वयंसेवकों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने देश की आजादी, समाज की एकता, त्याग और संयम से जीवन जीने की जरूरत पर बात की। भागवत ने कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिए महापुरुषों ने बहुत त्याग किया था। आज के समय में भी देश और समाज के लिए उससे ज्यादा मेहनत और तप करने की जरूरत है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल रहे। नागपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने परेड और पारंपरिक मार्च भी किया। 

आजादी से ज्यादा मेहनत करने पर दिया जोर

विजयादशमी उत्सव में अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि देश पहले आपसी बंटवारे के कारण कमजोर हुआ और फिर उसे कई सालों तक गुलामी झेलनी पड़ी। आजादी के लिए कई महापुरुषों ने बलिदान दिया। उनके प्रयासों से देश स्वतंत्र हुआ। भागवत ने कहा कि आजादी के समय देश को स्वतंत्र कराने के लिए लोगों ने जिस तरह मेहनत और त्याग किया था, आज उससे भी ज्यादा तप करने की जरूरत है।

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संयमपूर्ण जीवन क्यों जरूरी है? 

मोहन भागवत ने अपने भाषण में अच्छे जीवन और समाज के लिए संयम पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा विचार होना चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति को सम्मान मिले और सभी की प्रतिष्ठा का ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि दुनिया में अलग-अलग तरह के लोग और विचार हैं। समाज में विविधता होने के साथ बदलाव भी होता रहता है। ऐसे में जीवन का उद्देश्य सुख पाना है, लेकिन इसके लिए संयम और त्याग के साथ जीवन जीना जरूरी है। भागवत के अनुसार, समाज में एक-दूसरे का सम्मान करने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने से बेहतर माहौल बनाया जा सकता है। उनके भाषण में व्यक्तिगत जीवन के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी का मुद्दा भी प्रमुख रहा।

RSS के विजयादशमी उत्सव में हुआ शस्त्र पूजन

नागपुर में RSS के वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से हुई। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया। विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन संघ के कार्यक्रम का अहम हिस्सा रहता है। इस मौके पर पारंपरिक शस्त्र रखे गए और पूजा की गई। कार्यक्रम में शामिल स्वयंसेवकों ने तय कार्यक्रम के अनुसार मार्च भी किया। विजयादशमी को दशहरा भी कहा जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। RSS हर साल इस दिन अपना स्थापना दिवस भी मनाता है। संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।

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हेडगेवार और गोलवलकर को दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने संघ के दूसरे प्रमुख एमएस गोलवलकर की समाधि पर भी फूल चढ़ाए। डॉ. हेडगेवार ने 1925 में RSS की स्थापना की थी। इसके बाद संगठन का विस्तार हुआ और विजयादशमी का वार्षिक उत्सव संघ की प्रमुख परंपराओं में शामिल हो गया। इस साल का आयोजन संघ के 100 साल पूरे होने के बाद शताब्दी वर्ष के समापन से भी जुड़ा है। इसलिए नागपुर के इस कार्यक्रम को संगठन के लिए खास माना जा रहा है।

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स्वयंसेवकों ने किया प्रदक्षिणा संचालन और पथ संचलन

विजयादशमी उत्सव में RSS स्वयंसेवकों ने प्रदक्षिणा संचालन किया। इसमें प्रशिक्षित स्वयंसेवक तय रास्ते पर एक साथ, अनुशासन के साथ चलते हैं। इस तरह के मार्च को पथ संचलन भी कहा जाता है। ऐसे कार्यक्रमों में स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर चलते हैं और संगठन के अनुशासन का प्रदर्शन करते हैं। RSS के विशेष शिविरों और विजयादशमी जैसे बड़े कार्यक्रमों में इस तरह का मार्च आयोजित किया जाता है। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे। दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि थे। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच को भी कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था।

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RSS की स्थापना और विजयादशमी का महत्व

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन हुई थी। इसी कारण संघ हर साल इस त्योहार पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। इस अवसर पर संघ प्रमुख का भाषण कार्यक्रम का अहम हिस्सा होता है। विजयादशमी उत्सव में संगठन से जुड़े लोग, आमंत्रित अतिथि और स्वयंसेवक शामिल होते हैं। इस दौरान शस्त्र पूजन, मार्च और संबोधन जैसे कार्यक्रम होते हैं।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

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