महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में बृजभूषण शरण सिंह बरी,कोर्ट ने कहा- सबूत पर्याप्त नहीं

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
कोर्ट ने कहा- सबूत पर्याप्त नहीं
महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों के मामले में बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया गया है

नई दिल्ली। महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में बृजभूषण शरण सिंह के साथ-साथ WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्य आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। कोर्ट ने यह भी माना कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास पाए गए।

अदालत ने सबूतों को नहीं माना पर्याप्त

राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसी आधार पर दोनों को बरी कर दिया गया। बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे। 10 मई 2024 को अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय किए थे, जिसके बाद मामले का ट्रायल शुरू हुआ।

फैसले के बाद क्या बोले बृजभूषण शरण सिंह

अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मैंने पहले जो कहा था, वही अब सही साबित हुआ है। वहीं, उनके वकील ने कहा कि वे अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उनका पक्ष यह रहा कि शिकायत और शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई विसंगतियां और विरोधाभास थे। विस्तृत आदेश आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी जाएगी।

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छह महिला पहलवानों ने लगाए थे आरोप

इस मामले में छह महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न, पीछा करने (स्टॉकिंग) और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था।

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करीब साढ़े तीन साल चली कानूनी प्रक्रिया

यह मामला जनवरी 2023 में शुरू हुआ था। 18 जनवरी 2023 को पहलवानों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद शिकायत, जांच, एफआईआर, चार्जशीट और अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया चली। 15 जून 2023 को दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह और तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 20 जुलाई 2023 को दोनों को नियमित जमानत मिली।

21 मई 2024 को दोनों पर औपचारिक आरोप तय किए गए और उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना किया। मामले में 26 जुलाई 2024 से अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही शुरू हुई। 25 मई 2026 तक अभियोजन पक्ष के अंतिम गवाह की गवाही पूरी हुई। इस दौरान कुल 32 गवाहों से पूछताछ की गई, जबकि 9 गवाहों को अभियोजन पक्ष ने हटा दिया। इसके बाद 8 जून 2026 को दोनों आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। 9 जून से अंतिम बहस शुरू हुई, जो 2 जुलाई 2026 को पूरी हुई। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और 3 अगस्त 2026 को अपना निर्णय सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया।

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By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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