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Shivani Gupta
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Garima Vishwakarma
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भोपाल। ब्रेस्ट कैंसर को लेकर की गई छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। ज्यादातर महिलाएं तब डॉक्टर तक पहुंचती हैं, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं कि 10 में से 6 महिला मरीजों में कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पकड़ा जा रहा है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि इसमें से भी 60 फीसदी की स्थिति तब तक गंभीर हो चुकी होती है। यह चौंकाने वाले आंकड़े AIIMS भोपाल के एक शोध में सामने आए।
AIIMS भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉली विभाग द्वारा पिछले छह महीनों में किए गए अध्ययन में 167 ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 60% मरीजों में कैंसर की पहचान स्टेज-3 या स्टेज-4 में हुई। 32% मामलों में बीमारी स्टेज-2 में सामने आई, जबकि केवल 8% महिलाओं में ही ब्रेस्ट कैंसर स्टेज-1 में पकड़ा जा सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते पहचान हो जाए, तो ब्रेस्ट कैंसर से जिंदा बचने की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। लेकिन, जागरूकता की कमी इलाज की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, एडवांस स्टेज में पहुंचने के बाद इलाज जटिल, लंबा और महंगा हो जाता है, वहीं मृत्यु का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। वैश्विक स्तर पर वर्ष 2022 में 6.7 लाख महिलाओं की मौत ब्रेस्ट कैंसर से हुई।

चिकित्सकों के अनुसार, स्तन या बगल में गांठ, स्तन के आकार में बदलाव, निप्पल से स्राव, त्वचा में गड्ढे या लगातार दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना लक्षण के भी नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए, ताकि बीमारी शुरुआती स्टेज में ही कैंसर पकड़ा जा सके।
एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. विनय कुमार का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर की समय पर पहचान से सर्वाइवल रेट 90 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। जागरूकता और नियमित जांच ही मौतों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।