Naresh Bhagoria
3 Feb 2026
विदिशा/उमरिया। देश में शिक्षा व्यवस्था और आरक्षण से जुड़े कानूनों को लेकर एक बार फिर संवैधानिक बहस तेज हो गई है। यह विवाद अब संसद से निकलकर सड़कों तक पहुंचता नजर आ रहा है। मंगलवार को मध्य प्रदेश के विदिशा और उमरिया में सर्व सवर्ण समाज ने UGC कानून को ‘काला कानून’ बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
शिक्षा व्यवस्था से नाराज बड़ी संख्या में महिला और पुरुष प्रदर्शन में शामिल हुए और हाथों में UGC रोलबैक के पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे। विदिशा में प्रदर्शनकारियों की रैली कांच मंदिर से शुरू हुई जो महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पहुंची। यहां प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपकर यूजीसी कानून को वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के लोगों ने कहा कि नया यूजीसी कानून शिक्षा व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस कानून पर पुनर्विचार करने की मांग की। इस विरोध रैली में सर्वण समाज के अलावा भी कई समाज के लोगों ने हिस्सा लिया और यूजीसी कानूनों को छात्रों के खिलाफ बताया।

विदिशा के अलावा आज उमरिया में भी यूजीसी रेगुलर एक्ट को वापस लेने की मांग पर लोगों का सब्र टूट गया। इसी को लेकर कासोधन श्रवण समाज, वैश्य समाज और ब्राह्मण समाज के लोगों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून के कथित दुरुपयोग और जातिगत टिप्पणी के मामलों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

ज्ञापन में कहा गया कि यूजीसी रेगुलर एक्ट का दुरुपयोग कर जातिगत टिप्पणी के आधार पर छात्रों और आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे समाज में आपसी मतभेद पैदा हो रहे हैं। समाज के लोगों ने मांग की कि इस एक्ट को जबरन लागू न किया जाए और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामलों में न फंसाया जाए।

उमरिया में प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि जातिगत मामलों में श्रवण समाज को अकेला न छोड़ा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर इस कानून के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी मांग की कि मामूली विवादों को जातिगत टिप्पणी का रूप न दिया जाए और कानून का निष्पक्ष एवं न्यायसंगत तरीके से उपयोग किया जाए।