संतोष चौधरी, भोपाल। प्रदेश में काले हिरण और नीलगायों से किसानों को निजात दिलाने के लिए वन विभाग एक बार फिर बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाने जा रहा है। देश में अपनी तरह के इस अनूठे प्रयोग के दूसरे चरण में करीब 2 हजार काले हिरण और नीलगायों को गांवों और कृषि क्षेत्रों से हटाकर अभयारण्यों और जंगलों में शिफ्ट किया जाएगा।
दरअसल, देश में मप्र इकलौता राज्य है जहां हेलिकॉप्टर के जरिए बोमा पद्धति से वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का पहला प्रयोग सफल रहा था। इसी सफलता के आधार पर अब इसे और बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दूसरे चरण में भी नियंत्रित तरीके से जानवरों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित आवासों में बसाया जाएगा।
पहला अभियान बीते वर्ष 20 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच शाजापुर, आगर-मालवा और आसपास के जिलों में चलाया गया था। इस दौरान 846 काले हिरण और 67 नीलगायों, यानी कुल 913 वन्य प्राणियों को हेलिकॉप्टर से हांककर बोमा में कैद किया गया। बाद में इन्हें गांधी सागर अभयारण्य, नौरादेही अभयारण्य समेत अन्य सुरक्षित क्षेत्रों में छोड़ा गया।
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इस अभियान के लिए निजी कंपनियों से रॉबिन्सन हेलिकॉप्टर किराए पर लिया गया था, जिसने 1950 मिनट यानी 32.5 घंटे उड़ान भरी। हेलिकॉप्टर किराया और दक्षिण अफ्रीका से आई 6 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम समेत पूरे आॅपरेशन पर 4.55 करोड़ रुपए खर्च हुए। इस तरह प्रति वन्य प्राणी रेस्क्यू की लागत करीब 50 हजार रुपए रही।
मालवा क्षेत्र के 20 से अधिक जिलों में नीलगाय और काले हिरण किसानों के लिए गंभीर समस्या बन चुके हैं। ये झुंड में खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय से किसान इन्हें हटाने की मांग कर रहे थे, जिसके चलते वन विभाग ने यह विशेष अभियान शुरू किया।
- वन्यजीवों को बिना चोट पहुंचाए पकड़ने की प्रभावी तकनीक
- हेलिकॉप्टर से एक दिशा में हांककर नियंत्रित क्षेत्र में लाया जाता है
- घेराबंदी (बोमा) में सुरक्षित तरीके से कैद किया जाता है
- बाद में ट्रकों से दूसरी जगह शिफ्ट
- दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में प्रचलित
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मुख्य पाइंटर
- दूसरे चरण में 2 हजार वन्यजीवों का रेस्क्यू लक्ष्य
- पहले चरण में 913 वन्य प्राणी सफलतापूर्वक शिफ्ट
- 4.55 करोड़ रुपए कुल खर्च, प्रति प्राणी 50 हजार लागत
- मालवा के 20+ जिलों में फसल नुकसान बड़ी वजह
- गांधी सागर और अन्य अभयारण्यों में बसाने की तैयारी
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वर्जन
हेलिकॉप्टर के जरिए काले हिरणों और नील गाय को बोमा पद्धति से शिफ्ट करने का अभियान काफी सफल रहा है। इसके बाद दूसरे चरण में हिरणों को शिफ्ट करने केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है। नील गाय के लिए अनुमति की जरूरत नहीं होती है।
- शुभरंजन सेन, पीसीसीएफ (हॉफ)