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डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाईजी’ की 5वीं पुण्यतिथि: जौरा में हवन-पूजन और सर्वधर्म प्रार्थना, चंबल में शांति के योगदान को किया याद

जौरा के महात्मा गांधी सेवा आश्रम में डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाईजी’ की 5वीं पुण्यतिथि पर हवन-पूजन, सर्वधर्म प्रार्थना और पुष्पांजलि सभा आयोजित हुई।
डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाईजी’ की 5वीं पुण्यतिथि: जौरा में हवन-पूजन और सर्वधर्म प्रार्थना, चंबल में शांति के योगदान को किया याद
डॉ. एस.एन. सुब्बाराव भाईजी की 5वीं पुण्यतिथि

 मुरैना। गांधीवादी समाजसेवी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाईजी’ की पांचवीं पुण्यतिथि पर मंगलवार, 27 अक्टूबर को जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान हवन-पूजन, सर्वधर्म प्रार्थना सभा और पुष्पांजलि कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें याद किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर भाईजी के विचारों को अपनाने का संकल्प लिया।

भाईजी ने अपना पूरा जीवन शांति, अहिंसा, सामाजिक सद्भाव और मानव सेवा के लिए समर्पित किया था। चंबल क्षेत्र में हिंसा को कम करने और लोगों को गांधीवादी विचारों से जोड़ने के उनके प्रयासों को इस अवसर पर याद किया गया।

समाधि स्थल पर हवन-पूजन और पुष्पांजलि

कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी सेवा आश्रम परिसर में स्थित भाईजी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद गायत्री परिवार के पंडित शिवकुमार शर्मा और उनकी टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन कराया।

इस दौरान श्रद्धालुओं ने विश्वशांति, मानव कल्याण और समाज में भाईचारा बनाए रखने की प्रार्थना की। जौरा विधायक पंकज उपाध्याय, पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा और आश्रम के पदाधिकारियों सहित कई लोगों ने समाधि पर पुष्प अर्पित कर भाईजी को नमन किया।

राजगोपाल पी.वी. ने दिया शांति और सद्भाव का संदेश

महात्मा गांधी सेवा आश्रम के अध्यक्ष और गांधीवादी समाजसेवी डॉ. राजगोपाल पी.वी. ने विदेश से भेजे अपने संदेश में भाईजी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि भाईजी ने युवाओं को सेवा, अहिंसा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का महत्वपूर्ण काम किया।

उन्होंने कहा कि भाईजी को सच्ची श्रद्धांजलि देने का सबसे अच्छा तरीका उनके विचारों को जीवन में अपनाना है। समाज में नफरत और विभाजन के बजाय प्रेम, संवाद, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।

654 बागियों के आत्मसमर्पण का ऐतिहासिक प्रसंग

भाईजी के जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय 14 अप्रैल 1972 को जौरा के पगारा मैदान में सामने आया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, गांधीवादी प्रयासों से प्रभावित होकर 654 बागियों ने महात्मा गांधी के चित्र के सामने हथियार डाल दिए थे।

इस घटना को चंबल क्षेत्र में अहिंसा और शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। भाईजी ने अपने प्रयासों से यह संदेश दिया कि संवाद, विश्वास और समाज से दोबारा जुड़ने का अवसर हिंसा छोड़ने की राह बना सकता है।

सर्वधर्म प्रार्थना में गूंजे गांधीजी के प्रिय भजन

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान आश्रम के सभागार में सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई। भाईजी बाल मंदिर स्कूल के विद्यार्थियों ने ‘वैष्णव जन तो’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ जैसे भजनों का सामूहिक गायन किया।

कार्यक्रम में आश्रम के सचिव दिलीप जैन, संयुक्त सचिव प्रफुल्ल श्रीवास्तव, एकता परिषद के प्रदेश संयोजक डोंगर शर्मा और कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया।

Veersingh Sir
By Veersingh Sir

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