CG NEWS:गार्ड की हत्या, 4 बाल कैदी फरार... 48 घंटे बाद भी खाली हाथ पुलिस, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

रायपुर/ बिलासपुर न्यूज। बिलासपुर के सरकंडा बाल संप्रेषण गृह में सुरक्षा गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे की हत्या और चार बाल अपचारियों के फरार होने की घटना ने पूरे प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटना के 48 घंटे बाद भी चारों फरार हैं, तो पुलिस की घेराबंदी और जांच आखिर कितनी प्रभावी है? अब यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही का भी बन गया है।
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हत्या नहीं, सिस्टम की सुरक्षा पर हमला
सरकंडा स्थित बाल संप्रेषण गृह में चार बाल अपचारियों ने जिस तरह सुरक्षा गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे की हत्या कर फरार होने की साजिश को अंजाम दिया, उसने सुरक्षा व्यवस्था की कई परतें खोल दी हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह वारदात पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा थी।
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गार्ड को बनाया आसान निशाना
जानकारी के अनुसार चारों नाबालिगों ने पहले गार्ड के हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा और फिर गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद परिसर की चाबियां, सीसीटीवी का डीवीआर और अन्य सामान लेकर फरार हो गए।
सीसीटीवी भी ले गए, सुरक्षा भी ध्वस्त
सबसे गंभीर सवाल यह है कि आरोपी सीसीटीवी सिस्टम तक कैसे पहुंच गए? उन्होंने डीवीआर निकाल लिया, छत के रास्ते भाग निकले और गार्ड की बाइक लेकर आसानी से फरार हो गए। इससे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं।
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48 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली
घटना के दो दिन बाद भी चारों बाल अपचारी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। जिले भर में नाकेबंदी और कई टीमों की तलाश के बावजूद कोई सफलता नहीं मिलने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती घंटों में प्रभावी घेराबंदी होती तो शायद आरोपी इतनी दूर नहीं जा पाते।
परिजनों का आक्रोश, जवाबदेही की मांग
मृतक गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे के परिजनों ने मुआवजा, सरकारी नौकरी और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच सहित कई मांगें रखी हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था में भारी लापरवाही के कारण एक निर्दोष कर्मचारी की जान चली गई।
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अब जवाब किसके पास?
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र की परीक्षा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन बाल अपचारियों पर हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले दर्ज थे, उनकी निगरानी इतनी कमजोर क्यों थी? यदि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं।












