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SEBI ने जूही चावला के फैमिली ट्रस्ट को सौराष्ट्र सीमेंट में खुली पेशकश लाने से छूट दी

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक्ट्रेस जूही चावला और उनके पति जय मेहता के फैमिली ट्रस्ट  के सौराष्ट्र सीमेंट में प्रस्तावित अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए खुली पेशकश लाने से छूट दी है। वर्ष 2019 में स्थापित मेहता फैमिली ट्रस्ट में जूही चावला और उनके पति जय मेहता ट्रस्टी हैं।
SEBI ने जूही चावला के फैमिली ट्रस्ट को सौराष्ट्र सीमेंट में खुली पेशकश लाने से छूट दी
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मंगलवार को अभिनेत्री जूही चावला और उद्योगपति जय मेहता से जुड़े मेहता फैमिली ट्रस्ट को सौराष्ट्र सीमेंट लिमिटेड में प्रस्तावित अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए खुली पेशकश की बाध्यता से छूट दे दी। प्रस्तावित लेनदेन के तहत जय महेंद्र मेहता अपनी कंपनी गैलेक्सी टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड में 49.99 प्रतिशत हिस्सेदारी फैमिली ट्रस्ट को हस्तांतरित करेंगे। 

जूही 50 प्रतिशत हिस्सेदारी ट्रस्ट को सौंपेंगी

जूही चावला, ओम्ना एंटरप्राइजेज एलएलपी में अपनी 50.04 प्रतिशत लाभांश/ मताधिकार हिस्सेदारी इस ट्रस्ट को सौंपेंगी। गैलेक्सी और ओम्ना, सौराष्ट्र सीमेंट के प्रवर्तक समूह का हिस्सा हैं। उनकी संयुक्त रूप से सीमेंट कंपनी में 24.04 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वर्ष 2019 में स्थापित मेहता फैमिली ट्रस्ट में जूही चावला और उनके पति जय मेहता ट्रस्टी हैं।

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शेयरधारकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि सामान्य तौर पर इस तरह का अप्रत्यक्ष अधिग्रहण 'टेकओवर नियमों' के तहत खुली पेशकश को अनिवार्य बनाता है। लेकिन सेबी ने इस लेनदेन को प्रवर्तक परिवार के भीतर आंतरिक पुनर्गठन का हिस्सा बताते हुए उसे खुली पेशकश लाने से छूट दे दी। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तावित अधिग्रहण गैर-वाणिज्यिक प्रकृति का है और इससे सार्वजनिक शेयरधारकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

नियंत्रण में नहीं होगा बदलाव

आदेश के अनुसार, इस लेनदेन के बाद सौराष्ट्र सीमेंट के नियंत्रण में कोई बदलाव नहीं होगा। प्रवर्तक समूह की हिस्सेदारी 66.62 प्रतिशत और सार्वजनिक शेयरधारिता 33.38 प्रतिशत बनी रहेगी। इसके साथ ही नियामक ने स्पष्ट किया कि यह छूट कुछ शर्तों के साथ दी गई है, जिनमें अधिग्रहण की तिथि से 21 दिन के भीतर रिपोर्ट दाखिल करना शामिल है। यह छूट एक वर्ष तक ही मान्य रहेगी, जिसमें प्रस्तावित अधिग्रहण पूरा करना होगा।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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