'बच्चों का भविष्य बचाइए'...आदिवासी गांव सेहरा में शराबबंदी की उठी मांग, महिलाओं ने प्रशासन से लगाई गुहार

सोहागपुर। नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर के आदिवासी गांव सेहरा में महिलाओं ने गांव को नशामुक्त बनाने के लिए पहल की है। बड़ी संख्या में ग्रामीण, खासकर महिलाएं, एसडीएम कार्यालय और पुलिस थाने पहुंचीं। उन्होंने गांव में महुआ शराब के निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
महिलाओं ने बताई शराब से जुड़ी समस्याएं
जनपद सदस्य पार्वती दरसिंहा, समाजसेवी बारेलाल चौहान और कैलाश सोलंकी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अपनी मांग रखी। महिलाओं ने बताया कि महुआ शराब की वजह से गांव का माहौल खराब हो रहा है। छोटे बच्चे भी नशे की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि शराब के कारण आए दिन घरेलू विवाद और झगड़े हो रहे हैं।
एसडीएम ने कार्रवाई का दिया भरोसा
एसडीएम बबीता राठौर ने महिलाओं की बात गंभीरता से सुनी। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर भी ग्रामीणों को दिया और कहा कि शराब से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। उन्होंने मामले में आवश्यक कार्रवाई और हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
नशामुक्त गांव बनाने का लिया संकल्प
सेहरा गांव की महिलाओं ने साफ कहा कि वे अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित और गांव का माहौल शांतिपूर्ण बनाना चाहती हैं। उनका मानना है कि महुआ शराब पर रोक लगने से सामाजिक माहौल सुधरेगा और आने वाली पीढ़ी नशे की बुराई से बच सकेगी।
सामाजिक जागरूकता की बनी मिसाल
सेहरा गांव की यह पहल बताती है कि आदिवासी समाज में भी सामाजिक बदलाव और जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। महिलाओं की यह मुहिम न सिर्फ गांव को नशामुक्त बनाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।










