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जूनियर वकीलों को न्यूनतम स्टाइपेंड देने हाईकोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल से कहा 6 महीने में गाइडलाइन बनाओ

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जूनियर वकीलों के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य बार काउंसिल को छह महीने में गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए हैं। बीसीआई ने शहरी क्षेत्रों में ₹20 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹15 हजार मासिक स्टाइपेंड की सिफारिश की है।
जूनियर वकीलों को न्यूनतम स्टाइपेंड देने हाईकोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल से कहा 6 महीने में गाइडलाइन बनाओ
फाइल फोटो

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वकालत के शुरुआती दौर में संघर्ष कर रहे जूनियर वकीलों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने कहा है कि जूनियर वकीलों को न्यूनतम स्टाइपेंड (निर्वाह भत्ता) मिलना ही चाहिए, ताकि वे अपनी रोजमर्रा के खर्चे और आने-जाने का खर्च उठा सकें। बेंच ने इस बारे में स्टेट बार काउंसिल को मप्र स्टेट बार एसोसिएशन के साथ मिलकर जरूरी गाईडलाइन बनाने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर यदि गाइडलाइन बनती है तो इसका प्रदेश के उन 40 हजार वकीलों को फायदा मिलेगा।

सुनवाई में उठा स्टाइपेंड का मुद्दा

यह मुद्दा रीवा जिले के मनगवां थानांतर्गत ग्राम दुबहाई में रहने वाले विपिन पाण्डेय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा। दरअसल, याचिकाकर्ता की ओर से पेश जूनियर अधिवक्ता आयुषी मिश्रा से कोर्ट ने पूछा कि क्या उन्हें स्टाइपेंड मिलता है? सुश्री मिश्रा द्वारा इनकार किए जाने पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 15 अक्टूबर 2024 के उस सर्कुलर का हवाला दिया, जिसमें शहरी क्षेत्रों में कम से कम 20,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 15,000 रुपये प्रति माह न्यूनतम स्टाइपेंड दिए जाने की अनुशंसा की गई है।

तैयार करना होगी गाइडलाइन

अदालत ने कहा- चूंकि बीसीआई का सर्कुलर सिफ़ारिशी प्रकृति का है, इसलिए मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल द्वारा एम.पी. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और एम.पी. हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के परामर्श से इसे राज्य में अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए नियम बनाए जाएंगे।

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विशेष जांच के भी आदेश

अदालत ने मध्य प्रदेश बार काउंसिल को यह निर्देश भी दिए हैं कि वे मामले की जांच करें कि संबंधित केस में जूनियर अधिवक्ता को स्टाइपेंड क्यों नहीं दिया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया और गाइडलाइन जारी करने के लिए काउंसिल को छह महीने का समय दिया गया है।

आर्थिक सुरक्षा मिलना बेहद जरूरी

अपने आदेश में अदालत ने इस बात पर जोर दिया है कि वकालत के शुरुआती चरणों में जब जूनियर वकीलों के पास अपना स्वतंत्र काम नहीं होता, तब सीनियर वकीलों के साथ काम सीखने के दौरान उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलना बेहद जरूरी है। स्टेट बार काउंसिल रेग्युलेटरी बॉडी है, ऐसे में उसे देखना होगा कि जूनियर वकीलों को स्टाइपेंड दिया जाए, ताकि वो अपना और परिवहन का खर्चा उठा सकें।

किसको कितना स्टाइपेंड मिलेगा

शहरी क्षेत्र: 20 हजार रुपये प्रतिमाह

ग्रामीण क्षेत्र: 15 हजार रुपये प्रतिमाह

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जूनियर्स होंगे प्रोत्साहित

स्टेट बार काउंसि सदस्य मनीष तिवारी ने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश के पालन में जरूरी गाइडलाइन बनाई जाएगी, ताकि जूनियर वकील प्रोत्साहित हो सकें। हाईकोर्ट का यह कदम स्वागत योग्य है। आदेश की प्रति प्राप्त होते ही जरूरी गाइडलाइन बनाई जाएगी।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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