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केरवा डैम हादसे के बाद हरकत में आई सरकार :जल संसाधन मंत्री ने किया निरीक्षण, 3 गेटों के ऊपर का स्लैब जर्जर

भोपाल के केरवा डैम ब्रिज का स्लैब गिरने के एक दिन बाद बुधवार को जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी और मरम्मत कार्य जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।
जल संसाधन मंत्री ने किया निरीक्षण, 3 गेटों के ऊपर का स्लैब जर्जर
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। राजधानी के केरवा डैम ब्रिज का स्लैब गिरने के एक दिन बाद बुधवार को जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। मंगलवार को गेट नंबर 8 के ऊपर बना सीमेंट कंक्रीट का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया था। गनीमत यह रही कि हादसे के समय कोई वहां मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर गंभीर चूकें सामने आई हैं- न तो इलाके को बंद किया गया और न ही लोगों के आने-जाने पर रोक लगाई गई।

    मंत्री सिलावट ने किया मौके का निरीक्षण

    बुधवार को मंत्री तुलसीराम सिलावट खुद केरवा डैम पहुंचे और ढहे हुए हिस्से का मुआयना किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी और मरम्मत कार्य जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। हालांकि मौके पर यह भी देखा गया कि डैम इंचार्ज नितिन कुहिकर मीडिया से बात करने से बचते रहे। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं कि हादसे के बाद भी डैम क्षेत्र में लोगों की आवाजाही रोकी नहीं गई।

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    तीन गेटों के ऊपर का हिस्सा जर्जर

    जानकारी के अनुसार, कुल 8 गेटों में से 3 के ऊपर का स्लैब ढह चुका है, जबकि बाकी हिस्से की स्थिति भी ठीक नहीं बताई जा रही। कई जगहों पर सरिये सड़क चुके हैं, प्लास्टर झड़ रहा है और कंक्रीट के टुकड़े लटक रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कई महीनों से ब्रिज की हालत खराब थी, लेकिन विभाग ने इसकी मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया।

    सुरक्षा में भारी चूक, आवागमन पर नहीं लगी रोक

    हादसे के बाद भी लोगों का यहां आना-जाना जारी है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी सुबह तो पहुंचे, लेकिन बाद में कोई नहीं दिखा। यहां तक कि टूटे हिस्से को लेकर कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग तक नहीं लगाई गई। स्थानीय लोगों ने इसे “बड़ी प्रशासनिक लापरवाही” बताया है।

    इस बार नहीं खुले डैम के गेट 

    विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार केरवा डैम पूरी तरह नहीं भरा गया था। जहां कोलार, भदभदा और कलियासोत डैम के गेट कई बार खोले गए, वहीं केरवा डैम का एक भी गेट नहीं खोला गया। अगर डैम में पानी भरा होता तो सैकड़ों लोग यहां प्राकृतिक नजारे देखने आते, जिससे हादसे के समय बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। फिलहाल, कम पानी और सीमित भीड़ के कारण बड़ा नुकसान टल गया।

    प्रत्यक्षदर्शी बोला- कुछ देर और रुकता तो...

    प्रत्यक्षदर्शी शाहिद खान ने बताया कि हादसे के कुछ ही पल पहले वह ब्रिज के ऊपर से गुजरे थे। मैं गेट के ऊपर बना स्लैब पार कर रहा था, तभी पीछे से तेज आवाज आई और स्लैब का हिस्सा नीचे गिर गया। अगर मैं कुछ देर रुकता, तो शायद जिंदा नहीं बचता। उन्होंने बताया कि इस रास्ते से रोजाना गांव के कई लोग गुजरते हैं और बारिश के मौसम में हजारों सैलानी यहां आते हैं।

    डैम की उम्र और संरचना पर उठे सवाल

    बताया जाता है कि केरवा डैम का निर्माण भदभदा डैम से भी पहले हुआ था। भदभदा डैम वर्ष 1965 में बना, जबकि केरवा डैम लगभग 50 साल पुराना बताया जा रहा है। पत्थर की चुनाई से बना यह डैम अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी पुरानी संरचना की नियमित तकनीकी जांच और मरम्मत जरूरी है, जो अब तक उपेक्षित रही है।

    प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

    जल संसाधन मंत्री सिलावट ने कहा कि हादसे की तकनीकी जांच कराई जाएगी। प्राथमिक तौर पर यह संरचनात्मक कमजोरी और रखरखाव की कमी का मामला लगता है। हमने अधिकारियों को मरम्मत कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, विभाग के सूत्रों ने बताया कि फिलहाल ब्रिज के उस हिस्से को बंद कर दिया गया है, ताकि आगे कोई हादसा न हो।

    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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