भोपाल:दोस्तों की याद में भोपाल से बिहार निकल पड़ा 11 साल का बच्चा, गलत ट्रेन में बैठकर पहुंचा आगरा

पल्लवी वाघेला, भोपाल। बच्चे को तीन महीने पहले पढ़ाई के लिए भोपाल भेजा गया था, लेकिन वह अपने पुराने स्कूल और खास दोस्त को भूल नहीं पा रहा था। बिना किसी को बताए वह स्टेशन पहुंचा और बिहार जाने की सोचकर एक ट्रेन में बैठ गया। बाद में उसे एहसास हुआ कि वह गलत ट्रेन में है। टीटी की नजर पड़ने के बाद पूरा मामला सामने आया और परिजनों को सूचना दी गई।
दोस्त और घर की याद ने बढ़ाई बेचैनी
जानकारी के मुताबिक बच्चे के माता-पिता बिहार के एक इंटीरियर इलाके में रहते हैं। उन्होंने अपने बेटे को भोपाल में चाचा-चाची के पास रखकर स्कूल में दाखिला कराया था। तीन माह के भीतर ही बच्चा अपने पुराने दोस्तों और खास सहेली को बहुत याद करने लगा। बच्चे ने कई बार घर लौटने की इच्छा जताई थी। हालांकि, परिवार उसे समझाकर भोपाल में ही पढ़ाई जारी रखने की बात कहता रहा।
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अकेले ही स्टेशन पहुंचकर बैठ गया ट्रेन में
बच्चे ने बताया कि वह बिना किसी को जानकारी दिए स्टेशन पहुंच गया था। वहां उसे समझ नहीं आ रहा था कि कौन सी ट्रेन बिहार जाएगी। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने सामने खड़ी ट्रेन के बिहार जाने की बात कही। बच्चे ने उसी बात पर भरोसा किया और ट्रेन में बैठ गया। रास्ते में स्टेशनों के नाम देखकर उसे एहसास हुआ कि वह गलत दिशा में जा रहा है।
टीटी की नजर पड़ने के बाद हुआ रेस्क्यू
बच्चे ने सोचा था कि किसी बड़े स्टेशन पर उतर जाएगा, लेकिन उससे पहले ही टीटी की नजर उस पर पड़ गई। पूछताछ के दौरान बच्चे ने पूरी बात बताई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों और परिवार को सूचना दी गई। आगरा में बच्चे का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। बाद में समझाइश देकर उसे परिजनों को सौंप दिया गया।
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बच्चा बोला, दोस्त के बिना नहीं लगता मन
रेस्क्यू के बाद बच्चे ने कहा कि वह अपनी खास फ्रेंड के बिना नहीं रह पा रहा था। उसने बताया कि उसे हर समय अपने पुराने स्कूल और दोस्तों की याद आती थी। बच्चे ने यह भी कहा कि उसने अपनी दोस्त से भोपाल आने के लिए कहा था, लेकिन उसने पढ़ाई में मन लगाने की सलाह दी। बच्चे ने माना कि चाचा-चाची उसे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन उसकी भावनाओं को कोई समझ नहीं पा रहा था।
इस साल सामने आ चुके हैं ऐसे कई मामले
जानकारी के अनुसार, इस साल ऐसा यह तीसरा मामला है जब पढ़ाई के लिए बाहर भेजे गए बच्चे घर लौटने के लिए अकेले निकल पड़े। इससे पहले एक 15 वर्षीय किशोर भी दोस्तों की याद में स्टेशन पहुंच गया था। वहीं, एक 14 वर्षीय किशोरी भी अपने माता-पिता की याद में मौसी के घर से निकल गई थी। सभी मामलों में बच्चों को समय रहते रेस्क्यू कर लिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की मानसिक स्थिति और भावनाओं को समझना बेहद जरूरी है।












