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इंदौर:भोजशाला मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने एक और एसएलपी दाखिल

भोजशाला प्रकरण को लेकर कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष की ओर से विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। मामले में दोनों पक्षों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर मुस्लिम पक्ष फैसले को चुनौती दे रहा है, वहीं हिंदू पक्ष इसे ऐतिहासिक विजय बता रहा है।
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भोजशाला मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने एक और एसएलपी दाखिल

इंदौर। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने 25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। इससे पहले 21 मई को काजी मोइनुद्दीन की ओर से भी याचिका दायर की जा चुकी है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री 27 से 30 मई तक इंदौर और धार प्रवास पर रहेंगी। भोजशाला प्रकरण में एएसआई का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की एसएलपी

भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष की संस्था मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने 25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका प्रस्तुत की है। इससे पहले 21 मई 2026 को काजी मोइनुद्दीन की ओर से भी एसएलपी दायर की जा चुकी है। हालांकि उस याचिका पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद दोनों पक्षों की ओर से कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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हिंदू पक्ष ने फैसले को बताया ऐतिहासिक विजय

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने हाई कोर्ट के निर्णय को हिंदू समाज की ऐतिहासिक जीत बताया है। संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री का 27 मई से 30 मई तक इंदौर और धार प्रवास प्रस्तावित है। इस दौरान वे भोजशाला में दर्शन-पूजन और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होंगी। संस्था के अनुसार लखनऊ के प्रसिद्ध महादेव मंदिर के तालाब से 108 कमल पुष्प लाकर मां वाग्देवी को अर्पित किए जाएंगे। 

याचिका में शामिल रहे कई प्रमुख नाम

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने बताया कि मई 2022 में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर याचिका में रंजना अग्निहोत्री, आशीष जनक, आशीष गोयल, सुनील सारस्वत और मोहित गर्ग याचिकाकर्ता हैं। रंजना अग्निहोत्री वर्ष 2024 में हुए भोजशाला सर्वेक्षण में भी शामिल रही थीं। उल्लेखनीय है कि वे पूर्व में श्री राम जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ मंदिर और श्री कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों में भी कानूनी लड़ाई लड़ चुकी हैं। भोजशाला प्रकरण में उनकी भूमिका को अहम माना जा रहा है।

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98 दिन तक चला था एएसआई का वैज्ञानिक सर्वे

आशीष गोयल के अनुसार 5 फरवरी 2024 को भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग की गई थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया। 22 मार्च 2024 से 27 जून 2024 तक कुल 98 दिन तक यह सर्वेक्षण चला। बताया जा रहा है कि बाद में आए फैसले में इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण आधार बनी। सर्वेक्षण के दौरान कई ऐतिहासिक तथ्यों और संरचनाओं का अध्ययन किया गया था।

बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति भी बनी थी अहम

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार के दिन अबाधित पूजा की अनुमति देने का आदेश दिया था। इसके बाद मामला फिर हाई कोर्ट पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने बाद में हिंदू पक्ष के समर्थन में निर्णय सुनाया। इस फैसले के बाद दोनों पक्षों की ओर से कानूनी और सामाजिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में दायर नई याचिकाओं पर आगे की सुनवाई को लेकर सभी की नजर बनी हुई है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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