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चंबल में हिंसा को अहिंसा से हराने वाले भाईजी को श्रद्धांजलि, 654 बागियों के आत्मसमर्पण से जुड़ी विरासत को किया याद

मुरैना के जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में गांधीवादी समाजसेवी डॉ. एसएन सुब्बाराव ‘भाईजी’ की पांचवीं पुण्यतिथि मनाई गई। हवन-पूजन, सर्वधर्म प्रार्थना और पुष्पांजलि के जरिए उन्हें याद किया गया। वक्ताओं ने चंबल में शांति स्थापित करने और 654 बागियों के आत्मसमर्पण में उनके योगदान को याद किया।
जौरा, मुरैना। चंबल के बीहड़ों में जहां कभी बंदूकों की गूंज और हिंसा का भय पहचान बन गया था, वहीं गांधीजी के सत्य, अहिंसा और प्रेम के विचारों ने शांति की नई इबारत लिखी। इस ऐतिहासिक बदलाव के सूत्रधार, प्रख्यात गांधीवादी समाजसेवी, स्वतंत्रता सेनानी और लाखों युवाओं के प्रेरणास्रोत डॉ. एसएन सुब्बाराव ‘भाईजी’ ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता, राष्ट्र निर्माण, विश्वबंधुत्व और सामाजिक सद्भाव के लिए समर्पित कर दिया।
भाईजी की 5वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार, 27 अक्टूबर को उनकी कर्मभूमि जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में श्रद्धा, आध्यात्मिकता और गांधीवादी विचारों से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भाईजी की समाधि पर पुष्पांजलि, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन, विश्वशांति के लिए प्रार्थना, सर्वधर्म सभा और उनके प्रिय भजनों के सामूहिक गायन ने पूरे आश्रम परिसर को गांधीमय बना दिया।

शांति के सिपाही तैयार करना सबसे बड़ी विरासत: राजगोपाल पीवी

महात्मा गांधी सेवा आश्रम के अध्यक्ष एवं विख्यात गांधीवादी समाजसेवी डॉ. राजगोपाल पीवी ने विदेश प्रवास के दौरान भेजे अपने संदेश में डॉ. सुब्बाराव ‘भाईजी’ के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि वे अहिंसा के पुजारी, स्वतंत्रता सेनानी और मानवता के सच्चे सेवक थे। उन्होंने चंबल अंचल को शांति और सद्भावना की राह पर आगे बढ़ाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
डॉ. राजगोपाल पीवी के संदेश के अनुसार, भाईजी ने 1970 के दशक में महात्मा गांधी सेवा आश्रम के माध्यम से राष्ट्रीय युवा योजना को सशक्त आधार दिया। उन्होंने देश-दुनिया में हजारों युवा शिविरों के जरिए राष्ट्र निर्माण, विश्वशांति, सामाजिक समरसता, सद्भावना और भाईचारे का संदेश प्रसारित किया। गांधीवादी मूल्यों पर आधारित उनका प्रयास युवाओं को सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने वाला आंदोलन बना।
डॉ. राजगोपाल पीवी ने संदेश में कहा कि भाईजी की स्मृति में सच्ची श्रद्धांजलि तभी सार्थक होगी, जब हम उनके अधूरे कार्यों और शांति के संकल्प को आगे बढ़ाएं। समाज में नफरत, विभाजन और युद्ध की प्रवृत्तियों को समाप्त करने के लिए प्रेम, संवाद, अहिंसा और विश्वबंधुत्व को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। भाईजी द्वारा तैयार किए गए शांति के सिपाहियों की विरासत को आगे बढ़ाना और अंतिम व्यक्ति तक सद्भावना का संदेश पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

समाधि स्थल पर वैदिक हवन-पूजन, विश्वशांति के लिए दीं पूर्णाहुतियां

कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी सेवा आश्रम परिसर में स्थित भाईजी की समाधि पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करने और आध्यात्मिक अनुष्ठान के साथ हुआ। समाधि स्थल को पुष्पहारों से सजाया गया था। गायत्री परिवार के पं. शिवकुमार शर्मा ने अपनी आध्यात्मिक टीम के साथ वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विधि-विधानपूर्वक हवन-पूजन संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित करते हुए विश्व में शांति, मानवता के कल्याण, सामाजिक समरसता और सद्भावना की कामना की।
हवन-पूजन में महात्मा गांधी सेवा आश्रम के सचिव दिलीप जैन, संयुक्त सचिव प्रफुल्ल श्रीवास्तव, एकता परिषद के प्रदेश संयोजक डोंगर शर्मा, लक्ष्मीनारायण शर्मा, कुलदीप तिवारी, मयूर खोले, संजय सिंह जादौन, मुनेश सिंह जाटव, आत्मसमर्पित बागी बहादुर सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदीश शुक्ला, हरिओम पाराशर और ब्रजमोहन मरैया सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। सभी ने भाईजी के जीवन-संदेश का स्मरण करते हुए शांति और मानव कल्याण के लिए प्रार्थना की।
हवन-पूजन के उपरांत जौरा विधायक पंकज उपाध्याय, पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा, आश्रम के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों और नगर के गणमान्य नागरिकों ने भाईजी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए अहिंसा, सत्य, प्रेम और सामाजिक एकता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

भाईजी का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत: पंकज उपाध्याय

जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने भाईजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. एसएन सुब्बाराव का जीवन समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने चंबल की धरती पर गांधीवादी विचारों के माध्यम से यह संदेश दिया कि हिंसा और वैमनस्य से नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और मानवीय संवेदनाओं से स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि भाईजी की विरासत को जीवित रखने का अर्थ है कि युवा पीढ़ी सत्य, अहिंसा, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को अपने जीवन का हिस्सा बनाए। चंबल की शांति और सद्भावना की परंपरा को मजबूत करना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान होगा।

भाईजी के विचारों में समाज को जोड़ने की ताकत: महेश दत्त मिश्रा

पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा ने कहा कि भाईजी ने अपने आचरण और कार्यों से गांधीवादी विचारों को जन-जन तक पहुंचाया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि समर्पण, प्रेम और अहिंसक प्रयासों से समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज समाज को भाईजी के भाईचारे, विश्वबंधुत्व और समरसता के संदेश को आत्मसात करने की आवश्यकता है। उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और समाज में आपसी विश्वास कायम रखना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

दिलीप जैन ने किया भाईचारे और सर्वधर्म समभाव का आह्वान

महात्मा गांधी सेवा आश्रम के सचिव दिलीप जैन ने अपने विचारों में भाईजी के गांधीवादी दर्शन, युवाओं के प्रति उनके विश्वास और सामाजिक एकता के लिए किए गए कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि भाईजी ने युवाओं को केवल अपने भविष्य के निर्माण की प्रेरणा नहीं दी, बल्कि उन्हें समाज, राष्ट्र और पूरी मानवता के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का मार्ग भी दिखाया।
दिलीप जैन ने कहा कि भाईजी का संदेश किसी एक वर्ग, धर्म या क्षेत्र तक सीमित नहीं था। वे सभी धर्मों के सम्मान, आपसी सद्भाव, समानता और भाईचारे में विश्वास रखते थे। चंबल अंचल में शांति की स्थापना ने क्षेत्र के सामाजिक जीवन को नई दिशा देने में योगदान किया।
आज क्षेत्र में शांति, विकास और खुशहाली की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए भाईजी के विचारों को व्यवहार में उतारना जरूरी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि मतभेदों को संवाद से सुलझाएं और मानवता को सर्वोपरि रखें।

654 बागियों का आत्मसमर्पण बना विजय का प्रतीक

भाईजी के जीवन का सबसे ऐतिहासिक और प्रेरणादायी अध्याय 14 अप्रैल 1972 को जौरा के पगारा मैदान में सामने आया, जब गांधीवादी विचारों से प्रभावित होकर 654 बागियों ने महात्मा गांधी के चित्र के समक्ष अपने हथियार डाल दिए। यह घटना चंबल के इतिहास में अहिंसक प्रयासों, संवाद और मानवीय विश्वास की उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में स्मरण की जाती है।
भाईजी ने अपने प्रयासों से यह संदेश दिया कि हिंसा के चक्र को तोड़ने के लिए केवल दंड और भय पर्याप्त नहीं हैं; इसके लिए संवेदना, विश्वास, पुनर्वास और समाज से दोबारा जुड़ने का अवसर भी आवश्यक है। चंबल के बीहड़ों में शांति और सद्भावना का वातावरण बनाने की उनकी पहल ने देशभर में गांधीवादी समाजसेवा की एक विशिष्ट पहचान स्थापित की।

सर्वधर्म प्रार्थना सभा में गूंजे गांधीजी और भाईजी के प्रिय भजन

हवन-पूजन और समाधि स्थल पर पुष्पांजलि के बाद महात्मा गांधी सेवा आश्रम के सभागार में सामूहिक सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई। आश्रम के सचिव दिलीप जैन ने प्रार्थना संपन्न कराई, जबकि कार्यक्रम का संचालन भाईजी बाल मंदिर स्कूल के संचालक जिम्मी जार्ज ने किया।
इस अवसर पर भाईजी बाल मंदिर स्कूल के विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी और भाईजी के प्रिय भजनों ‘वैष्णव जन तो’ तथा ‘रघुपति राघव राजा राम’ का सामूहिक सस्वर गायन किया। भजनों की मधुर स्वर-लहरियों के बीच उपस्थित लोगों ने भाईजी के प्रेम, करुणा, विश्वबंधुत्व, सद्भावना और सर्वधर्म समभाव के संदेश को याद किया। विद्यार्थियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को भावपूर्ण स्वरूप प्रदान किया और नई पीढ़ी को गांधीवादी मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा दी।

बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों और विद्यार्थियों ने दी श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जौरा विधायक पंकज उपाध्याय, पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा, महात्मा गांधी सेवा आश्रम के सचिव दिलीप जैन, संयुक्त सचिव प्रफुल्ल श्रीवास्तव, एकता परिषद के प्रदेश संयोजक डोंगर शर्मा, अनिल गुप्ता,हाजी साकिर हमीद, उदयभान सिंह परिहार, जिम्मी जार्ज, आत्मसमर्पित बागी बहादुर सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदीश शुक्ला,हाजी साकिर हमीद,सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश गुप्ता, लक्ष्मीनारायण शर्मा, कुलदीप तिवारी, मयूर खोले, संजय सिंह जादौन, मुनेश सिंह जाटव, हरिओम पाराशर, ब्रजमोहन मरैया, अजय सिंह गौर (मौनू), हरिओम, अनिल गुप्ता, महेंद्र भाई, अशोक गर्ग, रामहेत जाटव, अजीत राणा, मुरारी लाल अमर, दीपक यादव (ब्लॉक अध्यक्ष, कांग्रेस), ओमप्रकाश सखलेचा तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
भाईजी बाल मंदिर स्कूल के छात्र-छात्राओं और जिम्मी जार्ज सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ ने भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाग लेकर अपने प्रिय प्रेरणास्रोत को नमन किया। आश्रम से जुड़े कार्यकर्ताओं और नगर के नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने भाईजी के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा और उनके विचारों के प्रति जुड़ाव को प्रदर्शित किया।

भाईजी की विरासत- शांति, सेवा और मानवता का सतत अभियान

डॉ. एसएन सुब्बाराव ‘भाईजी’ की पांचवीं पुण्यतिथि का आयोजन केवल एक स्मरण समारोह नहीं, बल्कि गांधीवादी मूल्यों को जीवन में उतारने का सामूहिक संकल्प बना। उनके जीवन ने दिखाया कि सच्चा नेतृत्व समाज को बांटने में नहीं, बल्कि लोगों के बीच विश्वास कायम करने में है; युवाओं की शक्ति का उपयोग संघर्ष और वैमनस्य में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और मानव कल्याण में होना चाहिए। अंत में गांधी आश्रम के संयुक्त सचिव प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने सभी का आभार प्रकट किया।
Veersingh Sir
By Veersingh Sir

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