रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रदर्शन खत्म, आधी रात तालाब से निकाले गए प्रदर्शनकारी

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही गांव में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में चल रहा आदिवासियों का जल सत्याग्रह मंगलवार देर रात प्रशासनिक कार्रवाई के बाद समाप्त करा दिया गया। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे भारी पुलिस बल के साथ पहुंची प्रशासनिक टीम ने तालाब में प्रदर्शन कर रहे लोगों को बाहर निकाला। इस दौरान आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा समेत चार लोगों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें एंबुलेंस से संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रात 1 बजे भारी पुलिस बल के साथ पहुंचा प्रशासन
रोझौही गांव में न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में ग्रामीण जल सत्याग्रह कर रहे थे। सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और तालाब में उतरे प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाला। इस दौरान प्रमोद शर्मा, संदीप कोल, रावेन्द्र कोल और बबली कोल की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकीय जांच में प्रमोद शर्मा का ब्लड प्रेशर और शुगर स्तर काफी बढ़ा हुआ पाया गया। डॉक्टरों ने अनशन जारी रखने पर गंभीर खतरे की चेतावनी दी थी।
प्रशासन ने 10 दिन तक गतिविधियां रोकने का दिया आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान तनावपूर्ण स्थिति बनने पर प्रशासन ने ग्रामीणों को मौखिक रूप से आश्वस्त किया कि अगले 10 दिनों तक संयंत्र से जुड़ी कोई गतिविधि नहीं होगी। हालांकि, ग्रामीणों ने इस आश्वासन के लिए लिखित आदेश देने की मांग की है।
महिला की मौत के बाद बढ़ा विरोध
यह आंदोलन उस समय और उग्र हो गया, जब जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही करने और अधिकारियों पर धमकाने के आरोप लगाए। घटना के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार रोझौही पहुंचे। उन्होंने मृतका के परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी और परियोजना की जरूरत पर सवाल उठाए। सिंघार ने ग्रामसभा की सहमति, जमीन अधिग्रहण और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की है।
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करीब एक दर्जन गांवों के लोग कर रहे विरोध
रोझौही, सरई कला, मदरी समेत करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीण प्रस्तावित परियोजना को पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि न्यूक्लियर पावर प्लांट से उनकी खेती, क्योटी जलप्रपात और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। ग्रामीणों ने भविष्य में विकिरण के कारण कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा पैदा होने की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए वे आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से अगले 10 दिनों तक संयंत्र से जुड़ी गतिविधियां रोकने का मौखिक आश्वासन दिया गया है, लेकिन ग्रामीण लिखित आदेश पर अड़े हैं।




















