नर्मदा तट के सूरजकुंड में बनेगा भगवान परशुराम मंदिर, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी में भूमि पूजन
सोहागपुर। माखन नगर के समीपवर्ती नर्मदा तट पर स्थित भगवान सूर्य नारायण की तपोस्थली सूरजकुंड में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर 26 अक्टूबर को भगवान परशुराम मंदिर निर्माण के लिए विधि-विधान के साथ भूमि पूजन संपन्न हुआ।
मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में साधु-संतों, विद्वान पंडितों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ भूमिपूजन
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में नीलगढ़ आश्रम, भोपाल के पं. बृज बिहारी सरकार तथा सोहागपुर के शंभू दरबार के पं. प्रकाश मनमोहन मुद्गल उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात मां नर्मदा का पूजन किया गया तथा भगवान परशुराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की धार्मिक प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
पं. गौरव व्यास एवं अन्य विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ समस्त धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इस दौरान श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक आस्था का वातावरण बना रहा। आयोजन में बाहर से पधारे साधु-संतों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नागरिक शामिल हुए।
अतिथियों का माल्यार्पण कर किया सम्मान
कार्यक्रम के आयोजक पं. महेंद्र तिवारी एवं उनके सहयोगियों ने आमंत्रित अतिथियों का माल्यार्पण कर शॉल एवं श्रीफल भेंट करते हुए स्वागत और सम्मान किया। आयोजन में मनमोहन बावरिया, रमन शुक्ला, पत्रकार आदेश शर्मा, चुन्नीलाल मुद्गल तथा भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता हर्षित गुरु सहित अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
भगवान परशुराम मंदिर निर्माण के लिए आयोजित भूमि पूजन को सूरजकुंड की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता से जोड़कर देखा जा रहा है। नर्मदा तट पर स्थित इस प्राचीन आस्था स्थल पर मंदिर निर्माण की पहल से श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण रहा।
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नर्मदा पुराण में वर्णित है सूरजकुंड की महिमा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नर्मदा पुराण में सूरजकुंड का विशेष महत्व वर्णित है। मान्यता है कि इसी पवित्र स्थल पर भगवान सूर्य नारायण ने अपनी पत्नी छाया के साथ तपस्या की थी। यहां अश्विनी कुमारों का जन्म होने की मान्यता भी प्रचलित है।
सूरजकुंड की धार्मिक महत्ता का एक प्रमुख आधार यहां नर्मदा नदी का उत्तरवाहिनी होना भी बताया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष माह के पांच रविवारों को यहां स्नान करने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों सूरजकुंड में श्रद्धापूर्वक स्नान और पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा कुष्ठ सहित विभिन्न व्याधियों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इन्हीं धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक परंपराओं के चलते सूरजकुंड लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भगवान परशुराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का आयोजन इस पवित्र स्थल की धार्मिक पहचान को और अधिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
























