Parliament Monsoon Session:एंटी पेपर लीक बिल पीएम मोदी की सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण, लोकसभा में बोलीं बांसुरी स्वराज

एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान बांसुरी स्वराज ने इसे समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेपर लीक को गंभीर अपराध मानते हैं और इसी सोच के तहत यह विधेयक लाया गया है। भाजपा सांसद ने विपक्ष पर चुनिंदा मामलों में ही विरोध दर्ज कराने का आरोप लगाया। साथ ही यूपीए सरकार के दौर में हुई पेपर लीक की घटनाओं का हवाला देकर विपक्ष को घेरने की कोशिश की।
'युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है यह कानून'
लोकसभा में चर्चा के दौरान बांसुरी स्वराज ने कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 मौजूदा समय की सबसे अहम जरूरतों में से एक है। उनके अनुसार यह केवल कानून में बदलाव नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं की मेहनत सुरक्षित रहे, इसी उद्देश्य से सरकार यह संशोधन लेकर आई है और इसे व्यापक समर्थन मिलना चाहिए।
'पीएम मोदी की संवेदनशीलता का प्रमाण है यह विधेयक'
भाजपा सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पेपर लीक एक घोर अपराध है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट नीति और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, संसद में इस संशोधन विधेयक को लाना इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।
पंजाब में हुए पेपर लीक का उठाया मुद्दा
बांसुरी स्वराज ने अपने संबोधन में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर भी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से प्रतिक्रिया दी जा रही है। उन्होंने पंजाब में सामने आए पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि विपक्ष वहां के शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं कर रहा। उनके अनुसार, अगर किसी मुद्दे पर जवाबदेही तय करनी है तो उसका पैमाना सभी सरकारों के लिए समान होना चाहिए।
'यूपीए सरकार में 22 बार परीक्षाओं के पेपर लीक हुए'
भाजपा सांसद ने कहा कि यह कहना गलत है कि पेपर लीक की समस्या केवल वर्ष 2014 के बाद शुरू हुई। उन्होंने दावा किया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे। उनके मुताबिक, उस दौर में कुल 22 पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें छह परीक्षाएं सीधे केंद्र सरकार के अधीन थीं। उन्होंने कहा कि ऐसे तथ्यों को नजरअंदाज कर केवल वर्तमान सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
बहस के बीच युवाओं के मुद्दे पर सियासत तेज
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर लोकसभा में जारी बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। एक ओर सरकार इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सख्ती लाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके प्रभाव और जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया के साथ राजनीतिक बहस भी तेज रहने की संभावना है।












