गायत्री फूड्स के डायरेक्टर किशन मोदी को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की दूसरी जमानत अर्जी

जबलपुर। दूध के नकली उत्पाद बनाकर उसे देश और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के आरोपों में गिरफ्तार किए गए गायत्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर किशन मोदी की दूसरी जमानत अर्जी भी मप्र हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। उसने बीमारी का हवाला देकर हाईकोर्ट से 3 महीने की अस्थायी जमानत मांगी थी। जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसने की बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि मात्र बीमारी के आधार पर आरोपी को जमानत का अधिकार नहीं मिल जाता है। बेंच ने कहा कि यदि वह बीमार है तो न्यायिक हिरासत में भी पर्याप्त इलाज मिलेगा।
नकली उत्पाद देश और विदेश में बेचने का आरोप
गौरतलब है कि भोपाल की गायत्री फूड प्रोडक्ट्स कंपनी द्वारा मिल्क मैजिक ब्रांड के नाम से डेयरी उत्पाद बनाए जाते हैं। मामले में आरोप है कि कंपनी के एमडी किशन मोदी ने दूध से प्राकृतिक फैट निकालकर उसकी जगह पॉम ऑयल और अन्य पदार्थ मिलाकर नकली उत्पाद बनाए और उन्हें न केवल देश, बल्कि विदेशों में भी बेचा। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ कि नकली उत्पाद बेचकर कंपनी ने करीब 20 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की है। इस मामले में 13 मार्च 2026 को गिरफ्तार किए गए किशन मोदी की पहली जमानत अर्जी 3 जून 2026 को खारिज हुई थी। इस फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट गया, जहां 30 जुलाई 2026 को उसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को यह छूट दी थी कि वह उचित समय पर निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) में नए सिरे से अर्जी लगा सकता है। लेकिन निचली अदालत जाने के बजाय आरोपी ने अस्थायी जमानत की मांग करते हुए सीधे हाईकोर्ट में यह अर्जी दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल एसएम गुरु ने दलीलें रखीं।
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इलाज के नाम पर किया था सुविधा का दुरुपयोग
ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी किशन मोदी को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया था। इस दौरान उसने सुविधाओं का गलत फायदा उठाया और वह अस्पताल में बिना किसी बंदिश के मोबाइल पर बात करते पाया गया था। इस घटनाक्रम के बाद उसकी सुरक्षा में लगे दो जेल गार्ड्स को सस्पेंड भी किया गया था।
साइकिल घोटाले के विवेचना अधिकारी पर करो कार्रवाई, EOW के डीजी को निर्देश
रायसेन जिले में वर्ष 2013 में स्कूली छात्रों को मिलने वाली साइकिलों से जुड़े घोटाले के मामले पर शुक्रवार को ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल उपेंद्र जैन हाईकोर्ट में हाजिर हुए। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने इस मामले में चार्जशीट पेश न करने वाले विवेचक के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश जैन को दिए हैं।
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सीमा और उमराव धाकड़ की याचिका
यह याचिका रायसेन जिले की बरेली तहसील की सहायक शिक्षक सीमा धाकड़ और उमराव धाकड़ की ओर से दाखिल की गई है। आवेदकों का कहना है कि वर्ष 2013 में कुछ अभिभावकों ने स्कूली छात्रों को मुफ्त मिलने वाली साइकिल की योजना में गड़बड़ी होने की शिकायत दी थी। ईओडब्ल्यू द्वारा 7 दिसंबर 2015 को इस मामले में याचिकाकर्ता व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इस एफआईआर पर सवाल उठाते हुए यह याचिका दायर की गई। मामले पर शुक्रवार को आगे हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एमआर वर्मा और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल उपेंद्र जैन हाजिर हुए।




















