पासबुक-एटीएम की लगी बोली! एक बैंक खाते की तीन बार हुई खरीद-फरोख्त,साइबर ठगों का नया फॉर्मूला

इंदौर। साइबर ठगों के लिए अब सिर्फ सिम कार्ड और मोबाइल ही कारोबार का जरिया नहीं रहे, बल्कि बैंक खाते भी खरीद-फरोख्त का सामान बन गए हैं। परदेशीपुरा पुलिस ने ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0 के तहत ऐसे ही एक नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें एक बैंक खाते को पहले महज 2 हजार रुपए में खुलवाया गया और देखते ही देखते उसकी कीमत 5 हजार से बढ़कर 10 हजार रुपए तक पहुंच गई। हैरानी की बात यह है कि इसी खाते का इस्तेमाल दूसरे राज्यों में हुई साइबर ठगी से जुड़ी रकम के लेन-देन में होने के संकेत मिले हैं। पुलिस की जांच में सामने आया कि खाते के असली धारक ने बैंक खाता खुलवाने के बाद उसकी पासबुक, चेकबुक, एटीएम और पूरी बैंकिंग किट दूसरे व्यक्ति को सौंप दी। इसके बदले उसे 2 हजार रुपए मिले। इसके बाद खाता एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता रहा और हर पड़ाव पर उसकी कीमत बढ़ती गई।
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2 हजार में खुला, 5 हजार में आगे बढ़ा
पुलिस के मुताबिक आई4सी और गृह मंत्रालय के पोर्टल पर उपलब्ध संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी की जांच के दौरान केनरा बैंक, नंदानगर शाखा का एक खाता संदिग्ध म्यूल अकाउंट के रूप में सामने आया। जब पुलिस ने खाते से जुड़े लेन-देन और शिकायतों की पड़ताल की तो इसका कनेक्शन आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में दर्ज साइबर फ्रॉड की शिकायतों से मिला। इसके बाद पुलिस ने खाताधारक मोनीश उर्फ मोनू मंडलोई से पूछताछ की। पूछताछ में उसने खाते की खरीद-फरोख्त की पूरी कहानी पुलिस को बताई। मोनीश के मुताबिक उसके मित्र पियूष उर्फ नयन उर्फ नाई कुशवाह के कहने पर उसने बैंक खाता खुलवाया था। खाता खुलने के बाद उसने बैंक से मिली पूरी किट पियूष को सौंप दी। इसके बदले पियूष ने उसे 2 हजार रुपए दिए। लेकिन इसके बाद खाते का खेल यहीं खत्म नहीं हुआ।
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एक खाते की तीन बार हुई डील
जांच में सामने आया कि पियूष ने वही बैंक खाता ऋषि उर्फ बिट्टू पवार को 5 हजार रुपए में बेच दिया। इसके बाद ऋषि ने बैंकिंग किट को आगे रानी उर्फ रूपेश मंगरोलिया को 10 हजार रुपए में उपलब्ध करा दिया।यानी एक ही बैंक खाते की तीन स्तर पर खरीद-फरोख्त हुई और हर बार उसकी कीमत बढ़ती गई।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाते को अंतिम रूप से किस साइबर नेटवर्क ने इस्तेमाल किया और इसके जरिए कितनी रकम का लेन-देन हुआ। दूसरे राज्यों में दर्ज शिकायतों से खाते का कनेक्शन मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।
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पांच नामजद, चार हिरासत में
मामले में पुलिस ने मोनीश मंडलोई, पियूष कुशवाह, ऋषि पवार, सुजल सोनी और रूपेश मंगरोलिया उर्फ रानी को नामजद किया है।इनमें मोनीश, पियूष, ऋषि और सुजल को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि रूपेश मंगरोलिया उर्फ रानी की तलाश जारी है।पुलिस आरोपियों से यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस तरह कितने बैंक खाते खुलवाकर आगे बेचे गए और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
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‘म्यूल अकाउंट’ बना साइबर ठगों का हथियार
साइबर अपराध की भाषा में ऐसे बैंक खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अपराध से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। इस मामले ने यह भी उजागर किया है कि किस तरह कुछ लोग मामूली रकम के लालच में अपना बैंक खाता और उसकी पूरी बैंकिंग किट दूसरे लोगों को सौंप देते हैं।


















