बीकॉम पास बना साइबर ठगों का ‘बैंक मैनेजर’! म्यूल खातों से क्रिप्टो के रास्ते विदेश तक पहुंचा रुपया!

इंदौर। साइबर ठगी का पैसा अब सिर्फ म्यूल खातों में जमा कर निकालने तक सीमित नहीं है। इंदौर पुलिस की जांच में ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों से ठगी की रकम पहले म्यूल बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी और फिर अलग-अलग माध्यमों से उसे आगे ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस को जांच के दौरान यूएसडीटी और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ठगी की रकम विदेश तक पहुंचाए जाने के संकेत मिले हैं।
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ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत क्राइम ब्रांच के साथ सराफा, एमजी रोड, संयोगितागंज और कोतवाली पुलिस की कार्रवाई में बैंक खातों की खरीद-फरोख्त और उन्हें साइबर ठगों के लिए इस्तेमाल करने का खेल सामने आया है। जांच में बंगाल, झारखंड, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक सहित कई राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों का कनेक्शन इंदौर के बैंक खातों से मिला है।
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बीकॉम स्नातक ने बेच दिया अपना बैंक खाता और सिम
डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी के अनुसार शुक्रवार को पुलिस ने तिलक नगर निवासी लक्की को गिरफ्तार किया है। आरोपी बीकॉम स्नातक है। पुलिस के मुताबिक उसने अपना बैंक खाता म्यूल अकाउंट के रूप में दूसरे लोगों को उपलब्ध कराया था। इतना ही नहीं, उसने अपने नाम का सिमकार्ड भी दूसरे लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया था। इस सिम पर बैंकिंग लेन-देन के दौरान आने वाले ओटीपी का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि बैंक खाते और मोबाइल सिम की मदद से संगठित तरीके से साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर किया जा रहा था।
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देशभर में ठगी, इंदौर के खातों में ‘एंट्री’
क्राइम ब्रांच ने राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, आई4सी, एनसीआरपी पोर्टल और साइबर क्राइम पोर्टल से मिले डेटा के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो कई खातों में अलग-अलग राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम जमा होने की जानकारी सामने आई। पुलिस को ऐसे खातों का पता चला, जिनमें बंगाल, झारखंड, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में हुई साइबर ठगी की राशि ट्रांसफर हुई थी। यानी ठगी कहीं और, रकम की एंट्री इंदौर में और इसके बाद पैसा दूसरे खातों या डिजिटल माध्यमों के जरिए आगे बढ़ता रहा।
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चार युवकों के खातों में पहुंचा यूपी की ठगी का पैसा
संयोगितागंज पुलिस ने शुक्रवार रात नट कॉलोनी, सिरपुर निवासी आदित्य, मिथुन पंवार, संदीप और अंशुल पाटीदार के खिलाफ दो केस दर्ज किए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपितों ने एचडीएफसी बैंक में खाते खुलवाए थे। जांच में इन खातों में उत्तर प्रदेश में हुई साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर होने की जानकारी मिली। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाताधारकों ने खाते किसके कहने पर खुलवाए और इन खातों से रकम आगे किन-किन लोगों तक पहुंचाई गई।
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केरल-कर्नाटक की ठगी की रकम भी मिली
रावजी बाजार पुलिस ने जयभवानी नगर निवासी विशाल सोनी के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार विशाल ने पलसीकर कॉलोनी स्थित इंडसइंड बैंक में खाता खुलवाया था। जांच में इस खाते में केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में हुई साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर होने की बात सामने आई है। पुलिस अब खाते से हुए पूरे लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
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ओडिशा की ठगी का पैसा भी इंदौर पहुंचा
एमजी रोड पुलिस ने साउथ गाडराखेड़ी, सदर बाजार निवासी अभिषेक पुरी के खिलाफ केस दर्ज किया है। उसका एमजी रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता है। जांच में सामने आया कि इस खाते में ओडिशा में हुई साइबर धोखाधड़ी की रकम जमा हुई थी। पुलिस यह पता लगा रही है कि खाते में रकम जमा होने के बाद उसे कहां और किस माध्यम से ट्रांसफर किया गया।
महारानी रोड के खातों में जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र की ठगी
कोतवाली पुलिस ने एमजी रोड निवासी जुबेर शाह और समीर हुसैन के खिलाफ केस दर्ज किया है। दोनों के महारानी रोड स्थित यूको बैंक में खाते हैं। जांच में इन खातों में जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में हुई साइबर ठगी की रकम जमा होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब दोनों खातों से हुए पुराने लेन-देन और उनसे जुड़े अन्य खातों की भी जांच कर रही है।
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बैंककर्मी भी पुलिस की रडार पर
म्यूल अकाउंट के इस पूरे खेल में अब बैंककर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। पुलिस की जांच में कुछ खातों को लेकर आरबीआई के नियमों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब संबंधित बैंककर्मियों को नोटिस जारी कर यह पूछताछ करेगी कि संदिग्ध खातों को खोलने और उनके संचालन के दौरान निर्धारित नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ। खाते खोलने के लिए दिए गए दस्तावेज, केवाईसी प्रक्रिया, मोबाइल नंबर, लेन-देन और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
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म्यूल अकाउंट से क्रिप्टो तक... विदेश कनेक्शन की तलाश
जांच का सबसे अहम पहलू साइबर ठगी की रकम को यूएसडीटी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश तक पहुंचाने से जुड़ा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इंदौर के म्यूल खातों से रकम किन डिजिटल माध्यमों में बदली गई और उसके बाद किन लोगों या वॉलेट तक पहुंचाई गई। पुलिस को आशंका है कि म्यूल खातों का इस्तेमाल केवल रकम जमा करने के लिए नहीं, बल्कि साइबर ठगी की रकम को कई स्तरों से घुमाकर उसकी पहचान छिपाने और विदेश तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था।



















