जंतर-मंतर केस में स्वतंत्र भारद्वाज पर FIR, POCSO समेत 5 धाराएं लगने के बाद बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर मारपीट के पुराने मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ नई FIR दर्ज की है। इसमें POCSO एक्ट, BNS और IT एक्ट की कई धाराएं शामिल की गई हैं। यह मामला 14 साल की बच्ची के पिता के साथ मारपीट से जुड़ा है। नई FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 78, 79 और 351 के साथ POCSO एक्ट की धारा 12 और IT एक्ट की धारा 67 लगाई गई हैं। हालांकि, FIR में शामिल कुछ धाराएं जमानती हैं और इन धाराओं के तहत हर स्थिति में तत्काल गिरफ्तारी जरूरी नहीं होती।
किन धाराओं में हुई कार्रवाई?
पुलिस ने नई FIR में कुल पांच धाराएं लगाई हैं। BNS की धारा 78 पीछा करने यानी स्टॉकिंग से जुड़ी है। इसके तहत दोष साबित होने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है। BNS की धारा 79 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित है। वहीं BNS की धारा 351 आपराधिक धमकी से जुड़ी है। इन धाराओं के अलावा मामले में POCSO एक्ट की धारा 12 भी लगाई गई है। यह बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में इस्तेमाल की जाती है। IT एक्ट की धारा 67 भी FIR का हिस्सा है। यह इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण से संबंधित प्रावधान है। इस तरह पुलिस ने मामले में अलग-अलग आरोपों से जुड़ी पांच धाराओं के तहत कार्रवाई की है।
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4 सितंबर को बुलंदशहर से हिरासत में लिया था
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। इसके अगले दिन यानी 5 सितंबर को उन्हें दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में जज के सामने पेश किया गया। सुरक्षा और अन्य कारणों को देखते हुए सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। पुलिस ने मामले की जांच और पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड मांगी। अदालत ने पुलिस की मांग पर स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। अब पुलिस मामले से जुड़े आरोपों और उपलब्ध सबूतों की जांच कर रही है।
क्या है जंतर-मंतर का पूरा मामला?
यह मामला 23 जून 2024 का बताया जा रहा है। उस दिन जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान शिकायतकर्ता अपनी 14 साल की बेटी के साथ पहुंचे थे। बताया गया है कि वहां वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान स्वतंत्र भारद्वाज पर बच्ची के पिता के साथ मारपीट करने का आरोप लगा। शिकायत के मुताबिक, मारपीट में उनके सिर पर गंभीर चोट आई थी और उन्हें कई टांके लगाने पड़े थे। बाद में मामले की जांच के दौरान अन्य कानूनी धाराएं भी जोड़े जाने की बात सामने आई। इनमें SC/ST एक्ट और POCSO एक्ट से संबंधित प्रावधान शामिल होने की जानकारी दी गई।
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वायरल वीडियो के बाद फिर चर्चा में आया मामला
पुराना मामला हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान सामने आए वीडियो के बाद दोबारा चर्चा में आया। वायरल वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज पर जंतर-मंतर की घटना का जिक्र करते नजर आए। वीडियो में उनके हवाले से दावा किया गया कि उन्होंने एक बच्ची के पिता के सिर पर चोट पहुंचाई थी। वीडियो में उन्होंने कुछ राजनीतिक नेताओं से अपने संबंधों का भी जिक्र किया। वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया। विपक्षी नेताओं ने पुलिस और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी और चंद्रशेखर आजाद ने उठाए सवाल
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने मामले को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष की ओर से पुलिस की कार्रवाई और अब तक की जांच को लेकर सवाल किए गए। इसके बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज की और स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिया। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हुई। पुराने वीडियो और जंतर-मंतर की घटना से जुड़े दावों को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में भी प्रदर्शन
जहां एक ओर विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए, वहीं स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में कुछ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की भी खबर सामने आई। समर्थन करने वाले लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया और मामले को लेकर अपनी आपत्ति जताई। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब पुलिस के सामने जांच को आगे बढ़ाने की चुनौती है। नई FIR में POCSO, BNS और IT एक्ट की धाराएं शामिल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
अब जांच और कोर्ट की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े आरोपों, वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध सबूतों की जांच कर रही है। अदालत में आगे होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आरोपी के खिलाफ जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। यह भी साफ करना जरूरी है कि FIR में किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप दर्ज होना दोष साबित होना नहीं है। अंतिम फैसला अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अब इस मामले में पुलिस की आगे की जांच, कोर्ट की सुनवाई और सामने आने वाले सबूतों पर सभी की नजर बनी हुई है।



















