आजमगढ़ में खौफनाक वारदात: पत्नी-पंडितों की हत्या के बाद बच्चों को बनाया बंधक, पुलिस से मुठभेड़ में आरोपी ढेर

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से एक सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पुलिस एनकाउंटर की खबर सामने आई है। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में पत्नी और घर पर पूजा कराने पहुंचे दो पंडितों की गोली मारकर हत्या करने वाले आरोपी अरविंद सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने बच्चों को भी एक कमरे में बंद कर रखा था और पुलिस के पहुंचने के बाद फायरिंग शुरू कर दी। इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी के बेटे की भी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बेटे को भी गोली मार दी थी। घायल बेटे को पुलिस अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पूजा को लेकर हुआ विवाद, फिर चलीं गोलियां
मामला अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव का है। यहां परिवार की ओर से घर में पूजा रखी गई थी। पूजा कराने के लिए दो पंडित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा घर पहुंचे थे। बताया गया कि अरविंद सिंह इस पूजा के खिलाफ था। करीब दो साल पहले उसके भाई गुड्डू सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। परिवार ने गुड्डू की आत्मा की शांति के लिए घर में पूजा कराने का फैसला किया था। अरविंद ने परिजनों से पूजा नहीं कराने को कहा था। लेकिन परिवार ने उसकी बात नहीं मानी और पूजा शुरू करा दी। इसी बात को लेकर वह गुस्से में आ गया। इसके बाद अरविंद ने अपनी पत्नी बबिता सिंह और पूजा कराने आए दोनों पंडितों पर गोली चला दी। गोली लगने से तीनों की मौत हो गई।
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बच्चों को कमरे में किया बंद
तीन लोगों की हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने अपने बच्चों को एक कमरे में बंद कर लिया था। पुलिस ने उसे समझाने और सरेंडर करने के लिए बातचीत शुरू की। अधिकारियों ने आरोपी से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने और हथियार छोड़ने की अपील की। पुलिस ने आरोपी के परिवार के लोगों की मदद से भी उसे समझाने की कोशिश की। लेकिन पुलिस के अनुसार, अरविंद लगातार धमकी देता रहा। उसने पुलिस और अपने परिवार के लोगों पर गोली चलाने की धमकी दी। इसी दौरान उसने अपने ही बेटे को गोली मार दी।
बेटे को गोली मारने के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
SSP डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक, कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आने के बाद पुलिस तुरंत अंदर पहुंची। पुलिस का दावा है कि इसके बाद आरोपी ने पुलिसकर्मियों पर लगातार फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने उसे रुकने की चेतावनी दी। अधिकारियों के अनुसार, चेतावनी के बावजूद फायरिंग जारी रही। पुलिस ने हवा में चेतावनी के तौर पर भी गोली चलाई, लेकिन आरोपी नहीं रुका। इसके बाद पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इसमें अरविंद सिंह घायल हो गया। पुलिस उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, आरोपी के बेटे को भी अस्पताल ले जाया गया था। उसकी भी मौत हो गई।
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SSP ने बताया पूरा घटनाक्रम
आजमगढ़ के SSP डॉ. अनिल कुमार ने आरोपी के एनकाउंटर में मारे जाने की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, पुलिस ने शुरुआत में आरोपी को समझाने और बिना किसी नुकसान के सरेंडर कराने की कोशिश की थी। SSP के अनुसार, पुलिस की प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षित निकालना थी। बातचीत के दौरान परिवार के लोगों को भी शामिल किया गया, लेकिन स्थिति बिगड़ गई। आरोपी ने पहले बेटे को गोली मारी और उसके बाद पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि इसी के बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
तीन हत्याओं तक पहुंचा मामला
आजमगढ़ का यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। जिस पूजा का उद्देश्य परिवार के दिवंगत सदस्य की आत्मा की शांति के लिए बताया जा रहा है, उसी को लेकर घर में ऐसा विवाद हुआ कि तीन लोगों की जान चली गई। इस घटना में आरोपी की पत्नी बबिता सिंह और पूजा कराने आए दोनों पंडित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा की हत्या हुई। इसके बाद पुलिस कार्रवाई में आरोपी अरविंद सिंह की मौत हुई और उसके बेटे की भी गोली लगने के बाद अस्पताल में मौत हो गई।



















