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अटल बिहारी वाजपेयी की 8वीं पुण्यतिथि आज, PM मोदी समेत दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि; याद आया ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा’

पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 8वीं पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। 'सदैव अटल' पहुंचकर नेताओं ने उन्हें याद किया। जानिए अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक सफर, प्रमुख फैसलों और देश के लिए उनके योगदान से जुड़ी अहम बातें।
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अटल बिहारी वाजपेयी की 8वीं पुण्यतिथि आज, PM मोदी समेत दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि; याद आया ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा’

नई दिल्ली। "अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।" पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के ये शब्द आज भी भारतीय राजनीति में उनकी पहचान का हिस्सा हैं। 16 अगस्त 2018 को दुनिया को अलविदा कहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की आज, 16 अगस्त 2026 को 8वीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने 'सदैव अटल' स्मारक पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री को पुष्पांजलि अर्पित की।

'सदैव अटल' पहुंचकर नेताओं ने किया नमन

नई दिल्ली स्थित 'सदैव अटल' स्मारक पर रविवार सुबह अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए कई बड़े नेता पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने स्मारक पर पुष्प अर्पित किए। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत अन्य नेता भी इस मौके पर मौजूद रहे। अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स में हुआ था। वह 93 वर्ष के थे। उनकी स्मृति में राजघाट के पास 'सदैव अटल' स्मारक बनाया गया है, जहां हर साल उनकी पुण्यतिथि पर देश के प्रमुख नेता उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।

PM मोदी ने बताया असाधारण राजनेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उन्हें असाधारण राजनेता बताया। पीएम मोदी ने कहा कि अटल जी ने अपना पूरा जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनके विचार, दूरदर्शी नेतृत्व और देश के लिए किए गए काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपने लंबे राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कई मौकों पर कर चुके हैं। सरकार की ओर से प्रकाशित सामग्री में भी वाजपेयी को 21वीं सदी में भारत के बदलाव की नींव मजबूत करने वाले नेताओं में गिना गया है। 

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अमित शाह ने परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध को किया याद

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने X पर लिखा कि वह पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के संस्थापक भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन करते हैं। अमित शाह ने वाजपेयी के नेतृत्व में हुए परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत ने दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया। शाह ने उनकी मूल्य आधारित राजनीति, अंत्योदय और सुशासन की सोच को भी याद किया।

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लोकतंत्र को लेकर अटल की सोच आज भी याद की जाती है

अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीति सिर्फ सत्ता तक सीमित नहीं थी। वह अपने भाषणों में लोकतंत्र और देशहित को खास महत्व देते थे। उनका एक चर्चित कथन है- "सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, मगर ये देश रहना चाहिए, देश का लोकतंत्र रहना चाहिए।" यही वजह है कि राजनीतिक विरोधी भी कई मौकों पर उनके भाषण और राजनीतिक शैली की तारीफ करते रहे। वाजपेयी को एक ऐसे नेता के तौर पर देखा गया, जिनकी पहचान एक प्रभावशाली वक्ता, कवि और राजनेता के रूप में बनी।

तीन बार बने देश के प्रधानमंत्री

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रहे। उनका पहला कार्यकाल 1996 में सिर्फ 13 दिन का था। इसके बाद उन्होंने 1998 में दोबारा प्रधानमंत्री पद संभाला और 1998 से 1999 तक सरकार चलाई। 1999 में वह फिर प्रधानमंत्री बने और 2004 तक अपना कार्यकाल पूरा किया। वाजपेयी देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी रहे, जिन्होंने अपना पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा किया। गठबंधन सरकार के दौर में अलग-अलग दलों को साथ लेकर सरकार चलाना उनके राजनीतिक सफर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

पोखरण परमाणु परीक्षण से दुनिया को दिखाई भारत की ताकत

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के सबसे अहम फैसलों में 1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण शामिल है। राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण के बाद भारत ने खुद को परमाणु शक्ति के तौर पर मजबूती से स्थापित किया। इस फैसले के बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के दबाव और प्रतिबंधों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन सरकार अपने फैसले पर कायम रही। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भी वाजपेयी सरकार के नेतृत्व की चर्चा हुई। यही वजह है कि आज उनकी पुण्यतिथि पर अमित शाह ने परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध को विशेष तौर पर याद किया।

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सड़कों से लेकर टेलीकॉम तक, कई बड़े फैसले

वाजपेयी सरकार के दौर में देश के बुनियादी ढांचे पर भी खास जोर दिया गया। उनकी सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना शुरू की, जिसका उद्देश्य दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों को हाईवे नेटवर्क से जोड़ना था। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत भी उनके कार्यकाल में हुई। इसका मकसद गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ना था। टेलीकॉम और शिक्षा के क्षेत्र में भी उनके कार्यकाल के दौरान कई नीतिगत कदम उठाए गए। सरकारी प्रकाशनों में वाजपेयी सरकार के दौर की नई टेलीकॉम नीति, ग्रामीण सड़क योजना और शिक्षा से जुड़े अभियानों को उनके शासन की प्रमुख पहलों में गिना गया है।

'अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा' क्यों है खास?

अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे चर्चित राजनीतिक वाक्यों में 'अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा' शामिल है। उन्होंने यह बात 1980 में बीजेपी के शुरुआती दौर में कही थी। उस समय बीजेपी एक नई राजनीतिक ताकत के रूप में सामने आई थी और पार्टी को लोकसभा चुनाव में सिर्फ दो सीटें मिली थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में दिए अपने एक पुराने संबोधन में इन शब्दों का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि वाजपेयी का यह भरोसा उस समय सामने आया था, जब पार्टी अपने शुरुआती दौर में थी। आज, उनकी 8वीं पुण्यतिथि पर एक बार फिर अटल बिहारी वाजपेयी के वही शब्द, उनकी राजनीति और देश के प्रति उनकी सोच को याद किया जा रहा है। उनके समर्थक ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका को समझने वाले लोग भी उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद करते हैं, जिसने लंबे राजनीतिक जीवन में लोकतंत्र, राष्ट्रहित, सुशासन और विकास को अपनी राजनीति के केंद्र में रखा।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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