
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है राघव चड्ढा के साथ वे अन्य नाम पार्टी से अलग हो गए, जो कभी आप के लिए महत्वपूर्ण माने जाते थे। इनमें चड्ढा के अलावा छह अन्य सांसद भी हैं। इन सात नेताओं के इर्द-गिर्द बनी यह स्थिति आम आदमी पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। जहां एक ओर ये चेहरे पार्टी की पहचान और विस्तार में अहम रहे, वहीं अब उनके अलग होने या बदलते रुख ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। जानिए इनके बारे में-
राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के सबसे चर्चित युवा नेताओं में गिने जाते हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट से राजनीति में आए चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा से लेकर राज्यसभा तक का सफर तय किया है। पार्टी के वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत रणनीति में उनकी अहम भूमिका रही है। अपने प्रभावशाली भाषण और साफ छवि के कारण वे पार्टी का शहरी और शिक्षित वर्ग में मजबूत चेहरा माने जाते हैं।
संदीप पाठक को आम आदमी पार्टी का संगठनात्मक दिमाग कहा जाता है। आईआईटी से शिक्षित पाठक ने पार्टी के विस्तार और चुनावी रणनीतियों को जमीनी स्तर तक लागू किया। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के तौर पर उन्होंने कई राज्यों में पार्टी को मजबूत किया। हालांकि उनके भाजपा में शामिल होने से AAP को बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है। पाठक मूलत: छत्तीसगढ़ के मुंगेली के रहने वाले हैं।
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स्वाति मालीवाल ने राजनीति में आने से पहले सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान बनाई। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने महिला सुरक्षा और अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया। हाल के दिनों में उनका पार्टी नेतृत्व, खासकर अरविंद केजरीवाल के साथ विवाद भी चर्चा में रहा, जिसने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल खड़े किए।
हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज ऑफ-स्पिनर रहे हैं, जिन्होंने कई ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और राज्यसभा पहुंचे। उनकी पहचान एक आक्रामक और जोशीले खिलाड़ी के रूप में रही, जो अब सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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अशोक मित्तल एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और उद्योगपति हैं, जिन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना की। शिक्षा सुधार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को व्यापक रूप से सराहा जाता है। AAP से राज्यसभा सांसद रहने के बाद उनका इस्तीफा पार्टी के लिए बौद्धिक और शैक्षणिक क्षेत्र में एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है। हाल ही में इनके यहां छापे मारे गए थे।
राजेंद्र गुप्ता ट्राइडेंट ग्रुप के संस्थापक हैं, जो टेक्सटाइल, पेपर और केमिकल क्षेत्र में अग्रणी कंपनी है। उन्हें 2007 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। 2025 में AAP के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे गुप्ता का इस्तीफा पार्टी के लिए औद्योगिक और आर्थिक दृष्टिकोण से एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
विक्रमजीत सिंह साहनी एक जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी हैं। सन फाउंडेशन के जरिए उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में काम किया है। AAP से राज्यसभा सांसद रहे साहनी का पार्टी छोड़ना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर बड़े बदलाव की प्रक्रिया चल रही है।