'अब भाजपाई कहने से लोग चिढ़ रहे हैं':जंतर-मंतर प्रदर्शन पर अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी आंदोलन को कमजोर करने के लिए अपने लोगों को प्रदर्शनकारियों के बीच भेज रही है। उन्होंने कहा कि अब बीजेपी समर्थक भी खुलकर सामने आने से बच रहे हैं और जनता के सवालों का सामना करने में असहज महसूस कर रहे हैं। सपा प्रमुख ने कई मुद्दों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि जनता का भरोसा धीरे-धीरे बीजेपी से कम होता जा रहा है।
अखिलेश यादव ने एक्स पर वीडियो किया शेयर
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर शेयर किए गए अपने संदेश में कहा कि एक ओर बीजेपी और उसके सहयोगी प्रदर्शनकारियों के बीच अपने लोगों को भेजकर युवाओं को गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर जब उन्हें 'भाजपाई' कहा जाता है तो वे नाराज हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अपने आप में विरोधाभासी है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक आंदोलन को कमजोर करने के बजाय सरकार को युवाओं की बात सुननी चाहिए। जनता अब इस तरह की राजनीति को समझने लगी है।
'लोगों ने अपने घरों, दुकानों से बीजेपी के झंडा हटा दिए'
अखिलेश यादव ने दावा किया कि कई लोगों ने अपने घरों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और वाहनों से बीजेपी के झंडे हटा दिए हैं। यह केवल प्रतीकात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि लोगों की बदलती सोच का संकेत भी है। उनके अनुसार, जो लोग अब तक बीजेपी का समर्थन करते रहे, वे भी मौजूदा घटनाक्रम से निराश हैं। समय के साथ ऐसे लोगों का भरोसा भी पार्टी से उठता जा रहा है और जनता अब जवाब मांग रही है।
कई घटनाओं का जिक्र कर सरकार को घेरा
सपा प्रमुख ने अपने बयान में कई घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अयोध्या, दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए कहा कि इन घटनाओं ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का रवैया संतोषजनक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि जनता इन मामलों को गंभीरता से देख रही है और लोकतांत्रिक जवाबदेही की अपेक्षा कर रही है।
'बीजेपी के समर्थक सक्रिय नजर नहीं आ रहे'
अखिलेश यादव ने दावा किया कि बीजेपी के पेड और अनपेड समर्थक भी अब पहले की तरह सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनाक्रोश बढ़ने के कारण कई समर्थक सार्वजनिक रूप से पार्टी का बचाव करने से बच रहे हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर भी पहले जैसी सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच बढ़ते सवालों के कारण पार्टी समर्थकों के लिए जवाब देना पहले से ज्यादा कठिन हो गया है।
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सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं, रोजगार, महंगाई और सरकारी संस्थाओं के कामकाज को लेकर आलोचना की। साथ ही कई अन्य मामलों का जिक्र करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे अधिक जरूरी है।












