क्या अडाणी ग्रुप शुरू करेगा अपनी एयरलाइन?कंपनी ने दिया जवाब, जानिए पूरा मामला और क्या हैं मौजूदा नियम

नई दिल्ली। देश के एविएशन सेक्टर में पिछले कुछ दिनों से अडाणी ग्रुप को लेकर बड़ी चर्चा चल रही थी। खबरें थीं कि समूह अपनी खुद की एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रहा है और इसके लिए सरकार से नियमों में बदलाव की मांग भी की गई है। इन अटकलों के बीच अडाणी एंटरप्राइजेज ने आधिकारिक बयान जारी कर सभी दावों को खारिज कर दिया। कंपनी का कहना है कि फिलहाल एयरलाइन बिजनेस में उतरने की उसकी कोई योजना नहीं है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने एयरपोर्ट और एयरलाइन के बीच क्रॉस-ओनरशिप नियमों तथा भारत के एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि, अडाणी ग्रुप भारत में अपनी नई एयरलाइन शुरू करने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि समूह ने सरकार से एयरपोर्ट और एयरलाइन बिजनेस के बीच लागू क्रॉस-ओनरशिप नियमों में बदलाव करने का आग्रह किया है, ताकि एयरपोर्ट ऑपरेटर भी अपनी एयरलाइन चला सकें।
इन खबरों के सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी मौजूदा नियमों की समीक्षा और कानूनी सलाह लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी। हालांकि अब कंपनी ने साफ कर दिया है कि एयरलाइन शुरू करने की कोई योजना नहीं है।
कंपनी ने क्या कहा?
अडाणी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार को दी गई अपनी नियामकीय फाइलिंग में कहा कि एयरलाइन कारोबार में प्रवेश करने की खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसके पास इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और न ही फिलहाल एयरलाइन संचालन में उतरने की तैयारी की जा रही है। कंपनी के इस बयान के बाद बाजार में चल रही तमाम अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।
फिर एयरलाइन शुरू करने की चर्चा क्यों हुई?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अडाणी ग्रुप अपनी एविएशन मौजूदगी को और मजबूत करना चाहता था। समूह पहले से एयरपोर्ट संचालन, ग्राउंड हैंडलिंग, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (MRO) और पायलट ट्रेनिंग जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके अलावा ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) के साथ भारत में पैसेंजर जेट्स की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) स्थापित करने की योजना की चर्चा भी इस पूरे मामले से जोड़ी जा रही थी। माना जा रहा था कि यदि समूह अपनी एयरलाइन शुरू करता तो उसे इन विमानों का संभावित ग्राहक भी मिल जाता।
अडाणी ग्रुप की एविएशन सेक्टर में कितनी मौजूदगी है?
अडाणी ग्रुप आज भारत के सबसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटरों में शामिल है। कंपनी मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, गुवाहाटी, लखनऊ, तिरुवनंतपुरम, मंगलुरु और नवी मुंबई समेत कई प्रमुख एयरपोर्ट्स से जुड़ी परियोजनाओं का संचालन कर रही है। इसके अलावा ग्राउंड हैंडलिंग, MRO सेवाओं और पायलट ट्रेनिंग में भी कंपनी लगातार निवेश कर रही है।
अडाणी ग्रुप का एविएशन इकोसिस्टम
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सेगमेंट |
मौजूदा स्थिति |
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एयरपोर्ट संचालन |
8 प्रमुख एयरपोर्ट्स |
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ग्राउंड हैंडलिंग |
सक्रिय मौजूदगी |
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MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल) |
सेवाएं उपलब्ध |
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पायलट ट्रेनिंग |
सक्रिय |
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एयरलाइन |
कंपनी ने फिलहाल योजना से इनकार किया |
क्रॉस-ओनरशिप नियम क्या है?
भारत में एयरपोर्ट और एयरलाइन कारोबार के बीच हितों के टकराव से बचने के लिए क्रॉस-ओनरशिप नियम लागू हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत एयरपोर्ट ऑपरेटर किसी शेड्यूल्ड एयरलाइन में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकता। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरपोर्ट संचालक किसी एक एयरलाइन को फ्लाइट स्लॉट, पार्किंग या अन्य सुविधाओं में अनुचित लाभ न दें और सभी एयरलाइंस को समान अवसर मिलें।
सरकार किन बदलावों पर विचार कर रही थी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार घरेलू विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए इन नियमों की समीक्षा कर रही थी। यदि भविष्य में क्रॉस-ओनरशिप नियमों में ढील दी जाती है, तो एयरपोर्ट संचालित करने वाली कंपनियां भी एयरलाइन शुरू कर सकेंगी। दूसरी ओर एयरलाइंस कंपनियों को भी एयरपोर्ट्स में हिस्सेदारी लेने का मौका मिल सकता है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
भारत के एविएशन बाजार में किसका दबदबा है?
भारतीय घरलू विमानन बाजार में फिलहाल इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप का दबदबा है। दोनों कंपनियां मिलकर लगभग 90 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा रखती हैं।
भारत के घरेलू एविएशन बाजार की स्थिति
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एयरलाइन |
अनुमानित बाजार हिस्सेदारी |
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IndiGo |
65% |
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Air India Group |
25% |
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अन्य एयरलाइंस |
10% |
इसी वजह से सरकार इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
हितों के टकराव की बहस क्यों छिड़ी?
हाल ही में इंडिगो के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कहा था कि यदि एयरपोर्ट संचालकों को एयरलाइन चलाने की अनुमति दी जाती है, तो इससे हितों के टकराव की स्थिति बन सकती है। हालांकि उन्होंने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया, लेकिन बाजार में इसे अडाणी ग्रुप से जोड़कर देखा गया।
जानकारी के मुताबिक, कोई कंपनी एयरपोर्ट और एयरलाइन दोनों संचालित करती है तो वह अपनी एयरलाइन को बेहतर स्लॉट, पार्किंग और अन्य परिचालन सुविधाओं में प्राथमिकता दे सकती है। यही वजह है कि मौजूदा नियम बनाए गए हैं।
भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश में एयरपोर्ट्स की संख्या 350 से 400 तक पहुंचाना है। वर्ष 2014 में देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे। दूसरी ओर भारतीय एयरलाइंस लगातार नए विमानों के रिकॉर्ड ऑर्डर दे रही हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और विमानन सेवाओं का विस्तार तेज होने की उम्मीद है।
अगर भविष्य में नियम बदलते हैं तो क्या असर होगा?
अगर भविष्य में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की अनुमति मिलती है, तो सरकार को मजबूत नियामकीय व्यवस्था लागू करनी होगी। इसके लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि एयरपोर्ट और एयरलाइन का संचालन पूरी तरह स्वतंत्र रहे, स्लॉट आवंटन पारदर्शी हो और सभी एयरलाइंस को समान अवसर मिलें। इसके अलावा वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याओं और विमानों की डिलीवरी में देरी के कारण किसी नई एयरलाइन को बाजार में मजबूत स्थिति बनाने में कई साल लग सकते हैं।











