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सुवेंदु सरकार का मिशन ट्रिपल D : बंगाल में अब घुसपैठियों पर एक्शन, हर जिले में बनेंगे होल्डिंग सेंटर

पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध घुसपैठियों, खासकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या, को पहचानने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसे सुवेंदु सरकार का ट्रिपल D मिशन बताया जा रहा है, यानी डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट। इसके लिए हर जिले में 'होल्डिंग सेंटर' बनाए जाएंगे। होल्डिंग सेंटर में  संदिग्धों को 30 दिनों तक रखा जाएगा। घुसपैठियों की पहचान कर इन्हें बीएसएफ को सौंपकर उनके देशों में भेजा जाएगा।
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बंगाल में अब घुसपैठियों पर एक्शन, हर जिले में बनेंगे होल्डिंग सेंटर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अवैध घुसपैठियों को राज्य से बाहर निकालने का बड़ा वादा किया था। अब राज्य की नई सरकार ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत राज्य के हर जिले में विशेष ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाए जाएंगे, जहां संदिग्ध लोगों को रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि जिन लोगों की पहचान अवैध घुसपैठिए के रूप में होगी, उन्हें बाद में सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ को सौंप दिया जाएगा।

चुनावी वादे को अमल में लाने की तैयारी 

चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई सभाओं में कहा था कि अवैध घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा जाएगा। सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी इसी नीति को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होगी और अवैध रूप से रह रहे लोगों को सीधे बीएसएफ के हवाले किया जाएगा। सरकार का दावा है कि पिछली व्यवस्था में केंद्र के निर्देशों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया था, लेकिन अब प्रशासन पूरी सख्ती के साथ इस नीति पर काम करेगा।

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होल्डिंग सेंटर बनाने का आदेश जारी 

राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ की ओर से सभी जिलों को होल्डिंग सेंटर बनाने का आदेश जारी किया गया है। इन सेंटरों का इस्तेमाल उन लोगों को रखने के लिए किया जाएगा, जिन पर बांग्लादेशी या रोहिंग्या होने का संदेह होगा। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे लोगों को अधिकतम 30 दिनों तक इन सेंटरों में रखा जा सकेगा। राज्य सरकार ने साफ किया है कि केवल नए पकड़े गए संदिग्ध ही नहीं, बल्कि पहले से जेलों में बंद विदेशी कैदियों और डिपोर्टेशन प्रक्रिया का सामना कर रहे लोगों को भी यहां रखा जा सकता है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

केंद्र के निर्देशों के बाद बढ़ी कार्रवाई 

केंद्र सरकार पहले ही राज्यों को अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने के निर्देश दे चुकी है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल सरकार ने अब नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में कहा था कि राज्य में अब केंद्रीय कानून पूरी तरह लागू होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के दायरे में नहीं आते, उनकी पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने के बाद बीएसएफ को सौंपा जाएगा, ताकि उन्हें उनके मूल देश वापस भेजा जा सके।

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बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों पर सख्ती 

जारी निर्देश में कहा गया है कि राज्य में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिलों में होल्डिंग सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि जेलों से रिहा हुए विदेशी कैदियों और गैर-कानूनी रूप से रह रहे लोगों को भी इन सेंटरों में रखा जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों को जल्द से जल्द जरूरी ढांचा तैयार करने को कहा गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

पुलिस और प्रशासन को जारी हुए निर्देश 

राज्य सरकार ने इस संबंध में विस्तृत निर्देश राज्य पुलिस महानिदेशक, सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को भेज दिए हैं। इसके अलावा कोलकाता सहित सभी पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्तों को भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा गया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध लोगों की पहचान, दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए अलग-अलग स्तर पर टीमें बनाई जा रही हैं। सरकार चाहती है कि किसी भी मामले में कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो।

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केंद्र की गाइडलाइंस में होलडिंग सेंटर बनाने का जिक्र 

2 मई 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर आठ पन्नों की विस्तृत गाइडलाइंस जारी की थीं। इसमें राज्यों को निर्देश दिया गया था कि संदिग्ध विदेशी नागरिकों को रखने के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए जाएं। गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति पर भारतीय नागरिक न होने का संदेह होता है, तो कानून लागू करने वाली एजेंसियां उसे हिरासत में ले सकती हैं। उसे 30 दिनों तक होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा और इस दौरान उसके दस्तावेजों की जांच होगी। अंतिम फैसला संबंधित जिला मजिस्ट्रेट या जिला कलेक्टर स्तर का अधिकारी करेगा।

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स्पेशल टास्क फोर्स बनाने के भी निर्देश

केंद्र सरकार ने राज्यों को स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ बनाने के निर्देश भी दिए हैं। यह टीम अवैध इमिग्रेंट्स की पहचान और डिपोर्टेशन प्रक्रिया की निगरानी करेगी। जिन लोगों की पहचान घुसपैठिए के रूप में होगी, उनकी बायोमेट्रिक जानकारी केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इसके बाद उन्हें बॉर्डर गार्ड फोर्स को सौंपा जाएगा और भारत में ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि आपात स्थिति में बॉर्डर गार्ड या कोस्ट गार्ड जांच पूरी होने के बाद सीधे उन्हें सीमा पार भेज सकते हैं। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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