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प्रदेश में 4 वर्ष के अंदर भ्रामक प्रचार के जाल में फंसे 88 लोग

उपभोक्ता फोरम से 27 को मिला न्याय , 6 मामलों में बीमा कंपनियों की गलतियां नहीं , 55 प्रकरण पेंडिंग

अशोक गौतम-भोपाल। छतरपुर निवासी अनुभव राजन ने उपभोक्ता फोरम में दिसम्बर 2024 में एक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने फिलिप कार्ड से कपड़े और अन्य सामान बुलाए थे, लेकिन वह मापदंड पर खरे नहीं उतरे। इसको लेकर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। इस तरह का यह अकेला मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में चार वर्ष के अंदर निजी कंपनियों, कोचिंग संस्थाओं सहित अन्य कंपनियों के भ्रामक प्रचार और वादा खिलाफी को लेकर 88 पीड़ितों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं।

इन लोगों ने उपभोक्ता न्यायालय में मामला दर्ज कराते हुए न्याय की गुहार लगाई। उपभोक्ता फोरम में पिछले चार वर्ष के अंदर 33 मामलों का निराकरण किया गया। इसमें 27 लोगों के मामले कंपनियों द्वारा वादा खिलाफी और भ्रामक जानकारी देने के पाए गए हैं। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए उपभोक्ता फोरम ने कंपनियों से रिलीफ दिलाई है। साथ ही कंपनियों को हिदायत दी गई है कि इस तरह का वादा न करें जो लोगों को भ्रम में रखें।

6 मामलों में फोरम ने पाया कि कंपनियों ने जो वादा किया था, पेपर पर उपभोक्ताओं को जो आश्वस्त किया था उसके अनुरूप सेवाएं दी हैं। गड़बड़ियां नहीं मिलने के कारण इसको क्लोज कर दिया है। अभी 55 अन्य मामलों में फोरम द्वारा सुनवाई पूरी करना है।

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की शिकायतें ज्यादा

वर्ष 2020 से लेकर अबतक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं। इसमें स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी, रिलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस, मेडसेव हेल्थ इंश्योरेंस, मैक्स बुपे हेल्थ इंश्योरेंस, आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं। इन कंपनियों ने बीमा के दौरान जिस तरह के मेडिक्लेम देने का वादा किया था, इलाज कराने के दौरान उस वादे से ये मुकर गए।

ये है नियम

कोई भी कोचिंग संस्थाएं, हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी सहित अन्य कंपनियां वही वादा करेंगी, जो पूरा कर सकें। भ्रामक प्रचार-प्रसार अथवा किसी तरह से वादा खिलाफी नहीं करेंगी। शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ सजा, सहित दंड का प्रावधान है।

इसलिए फोरम में शिकायत की

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में बीमा कराया था। अस्पताल में भर्ती हुआ, इलाज कराया। कंपनियों ने इलाज में खर्च की पूरी राशि देने से मना कर दिया। इस मामले की शिकायत उपभोक्ता फोरम में की है। -ज्योति तिवारी, झाबुआ

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