छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच बुधवार सुबह बड़ा एनकाउंटर हुआ। DRG, STF, COBRA और CRPF की संयुक्त टीम सुबह 9 बजे सर्च ऑपरेशन पर निकली थी। जंगल में सर्चिंग के दौरान नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें 12 नक्सली मारे गए। अधिकारियों का कहना है कि संख्या और बढ़ सकती है। सभी शव बरामद कर लिए गए हैं।
इस मुठभेड़ में DRG के 3 जवान शहीद हो गए और 2 घायल हुए हैं। बस्तर रेंज के IG सुंदरराज पी. ने बताया कि शहीद हुए जवानों में- हेड कॉन्स्टेबल मोनू वडारी, जवान रमेश सोड़ी, कॉन्स्टेबल दुकारू गोंडे शामिल हैं। गंगालूर थाना क्षेत्र के जंगलों में अभी भी सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन जारी है।
CM विष्णुदेव साय ने कहा कि हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। वीर जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि। गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद अपनी आखिरी सांसें ले रहा है। हमारे बहादुर जवान बहादुरी से इतिहास लिख रहे हैं।
4 दिन पहले ही रायपुर में DGP कॉन्फ्रेंस हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, और NSA अजीत डोभाल मौजूद थे। इस बैठक में नक्सलवाद को खत्म करने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई थी। अब इस रणनीति के शुरुआती नतीजे दिख रहे हैं। गृह मंत्री शाह पहले ही नक्सलवाद खत्म करने की 31 मार्च 2026 की डेडलाइन दे चुके हैं।
ENCOUNTER से 16 दिन पहले ही देश के सबसे खतरनाक नक्सली कमांडरों में से एक माड़वी हिड़मा 18 नवंबर को मारा गया था। छत्तीसगढ़–आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मरेडमिल्ली के जंगलों में मुठभेड़ के दौरान जवानों ने हिड़मा, उसकी पत्नी रजक्का और 4 अन्य नक्सलियों को ढेर किया था।
गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बलों को 30 नवंबर तक हिड़मा को खत्म करने की समयसीमा दी थी। इसके बाद छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। हिड़मा डेडलाइन से 12 दिन पहले ही मार गिराया गया।
हिड़मा पिछले 20 वर्षों में 26 से ज्यादा बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है।
इनमें शामिल हैं-
2010 के दंतेवाड़ा हमले में 76 जवानों की हत्या हुई थी। यह नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा हमला माना जाता है। इस साजिश में हिड़मा के साथ बसवाराजू भी शामिल था, जो पहले ही एनकाउंटर में मारा जा चुका है।