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गैस त्रासदी का दर्द बरकरार :41 साल में क्विंटलों दवा खा चुके हैं गैस पीड़ित, एक दिन में खाते हैं 12-12 गोलियां

भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) का दर्द 41 साल बाद भी पीड़ितों को सहना पड़ रहा है। कई बीमारियों से घिरे इन पीड़ितों का जीवन दवाओं पर ही चल रहा है। इतने सालों में ये मरीज क्विंटलों दवा खा चुके हैं।
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41 साल में क्विंटलों दवा खा चुके हैं गैस पीड़ित, एक दिन में खाते हैं 12-12 गोलियां
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    शाहिद खान, भोपाल। 41 साल पहले हुई भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) ने न सिर्फ उस वक्त लोगों को अपनी जद में लिया, बल्कि गर्भ में पल रहे या सालों बाद जन्मे लोगों को भी शिकार बनाया। भोपाल में आज भी ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं जो 41 साल बाद भी इस जहर को जिस्म में न सिर्फ बीमारियों की शक्ल में महसूस कर रहे हैं, बल्कि दवाओं के सहारे जिंदा हैं। उस भयावह रात की प्रत्यक्ष पीड़िता 65 वर्षीय कस्तूरी बाई बताती हैं सुबह, दोपहर और शाम, हर भोजन के साथ गोलियां खाना मजबूरी है। दशकों में हम क्विंटल भर दवा खा चुके हैं।

    12 गोलियां रोज, फिर भी बीमारी में राहत नहीं

    कस्तूरी बाई का जब दवाइयों का रिकॉर्ड देखा और डॉक्टरों से बात की, तो यह सच सामने आया कि गैस पीड़ितों का पूरा जीवन लगातार दवाइयों पर ही गुजर रहा है। और ऐसी दवाएं खाने वाली सिर्फ कस्तूरी नहीं हैं, बल्कि कई ऐसे पीड़ित हैं जो इस दर्द को सहते हुए जीवन जी रहे हैं। 50 वर्षीय इस्माइल कहते हैं-मुझे शुगर, ब्लड प्रेशर, गुर्दे और दिल की बीमारी है। मैं कभी-कभी खाना भूल सकता हूं, लेकिन दवा नहीं। सुबह-दोपहर-शाम मिलाकर 12 गोलियां लेनी पड़ती हैं। खाना भी इसलिए खाता हूं कि जीने के लिए दवा खानी होती है। मुझे लगता है कि मैं एक महीने में कई किलो दवा खा जाता हूं। इस्माइल की बात सिर्फ एक पीड़ित की कहानी नहीं, बल्कि हजारों गैस प्रभावित परिवारों की हकीकत है।

    40 साल में 1.46 क्विंटल दवा, एक डरावना आंकड़ा

    कम्यूनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. विवेक पांडे बताते हैं कि दवा की एक औसत गोली का वजन 0.5 से 1 ग्राम माना जाता है। यदि औसतन 1 ग्राम प्रति गोली माना जाए और कोई पीड़ित रोजाना 10 गोलियां खाए, तो वह प्रतिदिन लगभग 10 ग्राम दवा शरीर में ले रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि गैस त्रासदी का जहर सिर्फ एक रात में नहीं मारा, बल्कि दशकों से इन लोगों के शरीर को भीतर-भीतर खोखला करता चला गया।

    दवा के गणित का चौंकाने वाला आंकड़ा

    • 1 गोली :1 ग्राम
    • 1 दिन में 10 गोली :10 ग्राम
    • 1 साल : 3650 ग्राम  (3.65 किलो)
    • 40 साल : 146 किलो यानी करीब 1.46 क्विंटल दवा

    इलाज के नाम पर सिर्फ मरहम-पट्टी हो रही

    शहर में गैस पीड़ितों के लिए कहने को सात अस्पताल है, लेकिन  यहां न पर्याप्त डॉक्टर हैं न ही इलाज की व्यवस्था। आठ महीने से एक भी ऑपरेशन नहीं हो पाया। हालात यह है कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में गैस पीड़ितों को सामान्य बीमारियों के इलाज और ऑपरेशन के नाम पर सिर्फ मरहम पट्टी ही की जाती है। इन अस्पतालों में हर दिन पांच हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। रोजाना करीब 3,000 मरीजों की जांच तो होती है, लेकिन जिन मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत होती है, उन्हें हमीदिया अस्पताल रैफर कर दिया जाता है।

    दो साल से एनेस्थीसिया विशेषज्ञ नहीं

    जवाहर लाल, कमला नेहरू, मास्टर लाल सिंह, खान शाकिर अली खान, रसूल अहमद सिद्दीकी और पल्मोनरी मेडिसिन सेंटर के यही हाल हैं। यहां एक भी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ नहीं है। इस बारे में गैस राहत विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएस राजपूत ने कहा कि विभाग सर्जरी बहाल करने के प्रयास कर रहा है। सर्जनों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने एनेस्थीसिया विशेषज्ञों से सहयोग लें।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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