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7 साल की बच्ची की हत्या में फांसी से बचा आरोपी: हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदली सजा, कहा- अपराध बेहद क्रूर, लेकिन ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ नहीं

CCTV और DNA साक्ष्यों से दोषसिद्धि बरकरार, मानसिक बीमारी के रिकॉर्ड को देखते हुए बदली सजा; आरोपी को प्राकृतिक जीवन के अंत तक जेल में रहना होगा
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7 साल की बच्ची की हत्या में फांसी से बचा आरोपी: हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदली सजा, कहा- अपराध बेहद क्रूर, लेकिन ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ नहीं
फाइल फोटो

इंदौर। सात साल की बच्ची की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को मिली फांसी की सजा को हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया है। अदालत ने माना कि अपराध बेहद जघन्य और गंभीर था, लेकिन मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं आता। इसी आधार पर अदालत ने मृत्युदंड को आजीवन कारावास में परिवर्तित करने का फैसला सुनाया।

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7 साल की बच्ची पर चाकू से किए थे 29 वार

मामले में आरोपी पर सात साल की बच्ची की हत्या करने का आरोप था। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने बच्ची पर चाकू से 29 वार किए थे, जिससे उसकी मौत हो गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।

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हाईकोर्ट में सजा को चुनौती

दोषी की ओर से हाईकोर्ट में मृत्युदंड के खिलाफ अपील दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के तथ्यों, अपराध की परिस्थितियों और आरोपी की स्थिति सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने अपराध की गंभीरता को स्वीकार किया, लेकिन मृत्युदंड बनाए रखने के लिए आवश्यक ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानदंड को पूरा नहीं माना।

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मृत्युदंड को उम्रकैद में बदला

हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को संशोधित करते हुए आरोपी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता के बावजूद हर जघन्य अपराध में मृत्युदंड देना उचित नहीं है। मृत्युदंड तभी दिया जाना चाहिए, जब मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में आता हो।

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बच्ची की हत्या के मामले में सुनाया गया था फैसला

सात साल की बच्ची की हत्या के इस मामले ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। बच्ची पर 29 बार हमला किए जाने की बात सामने आने के बाद निचली अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब आरोपी को जेल में आजीवन कारावास की सजा काटनी होगी।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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