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PU Special :हवा सुधारने के लिए MP को मिले ₹435 करोड़, फिर भी 7 शहर प्रदूषण की जद में; 3 साल में सिर्फ ₹228 करोड़ खर्च

मध्यप्रदेश में वायु प्रदूषण कम करने के लिए NCAP के तहत ₹434.78 करोड़ जारी हुए, लेकिन तीन साल में सिर्फ ₹228.37 करोड़ खर्च हो सके। भोपाल-इंदौर समेत 7 शहर PM-10 मानक से ऊपर हैं।
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हवा सुधारने के लिए MP को मिले ₹435 करोड़, फिर भी 7 शहर प्रदूषण की जद में; 3 साल में सिर्फ ₹228 करोड़ खर्च
हवा सुधारने के लिए MP को मिले ₹435 करोड़

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश के शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र सरकार से करोड़ों रुपए मिलने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हो पाई है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत प्रदेश के 7 शहर लगातार तीन वित्तीय वर्षों से PM-10 के राष्ट्रीय मानक से ऊपर बने हुए हैं। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच मध्यप्रदेश के इन सात शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए ₹434.78 करोड़ जारी किए गए। इनमें से सिर्फ ₹228.37 करोड़ ही खर्च हो पाए। यानी करीब ₹206.41 करोड़ की राशि खर्च नहीं हो सकी। खास बात यह है कि NCAP के तहत सड़क सुधार, हरियाली बढ़ाने, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने, धूल नियंत्रण और EV चार्जिंग जैसी गतिविधियों के जरिए प्रदूषण कम करने पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम की डेडलाइन अब 2026 में खत्म होने वाली है। यह योजना मूल रूप से 2025 तक थी लेकिन इसे एक साल के लिए बढ़ाया गया था।

7 शहरों में तीन साल से PM-10 का स्तर मानक से ऊपर

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक NCAP के तहत देश के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सिटी एक्शन प्लान लागू किए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में देश के 108 शहरों में 2017-18 के मुकाबले PM-10 की मात्रा में कमी दर्ज की गई। इनमें 72 शहरों में PM-10 में 20% से ज्यादा जबकि 26 शहरों में 40% से ज्यादा कमी दर्ज हुई। इसके बावजूद मध्यप्रदेश के सात शहर लगातार राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक से ऊपर बने हुए हैं।

3 साल में ₹228 करोड़ ही खर्च

मध्यप्रदेश के सात शहरों के लिए 2023-24 से 2025-26 तक कुल ₹434.78 करोड़ जारी हुए। इसमें से ₹228.37 करोड़ खर्च किए गए हैं। यानी उपलब्ध राशि का करीब आधा हिस्सा ही इस्तेमाल हो पाया। इसका मतलब है कि लगभग ₹206 करोड़ की राशि अभी तक खर्च नहीं हो सकी। अब जब NCAP की तय समयसीमा खत्म होने में करीब चार महीने ही बचे हैं, तब बचे हुए फंड के इस्तेमाल और उसके जमीनी असर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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ग्वालियर ने आवंटित राशि से ज्यादा खर्च बताई

ग्वालियर को वायु गुणवत्ता सुधार के लिए ₹35.15 करोड़ मिले थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ग्वालियर नगर निगम ने ₹39.86 करोड़ खर्च किए हैं, जो जारी राशि से ज्यादा है। इस संबंध में जानकारी लेने के लिए ग्वालियर की प्रभारी निगम आयुक्त संघमित्र से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला।

देश में सिर्फ 14 शहर मानकों पर खरे

NCAP के तहत चल रहे प्रयासों के बावजूद वर्ष 2025-26 में देश के सिर्फ 14 शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे। हालांकि 2017-18 में ऐसे शहरों की संख्या केवल छह थी। सरकार के अनुसार देश के 119 शहरों में प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने के लिए सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी भी कराई गई है। सरकार ने देशभर में रियल टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया है। वर्तमान में 292 शहरों में रियल टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) उपलब्ध कराया जा रहा है।

रोड डस्ट और वाहनों का बढ़ता दबाव बड़ी वजह

सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े रहे अभय कुमार सक्सेना के मुताबिक वायु प्रदूषण के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। इनमें रोड डस्ट, खुले में चल रहे निर्माण कार्य और वाहनों की बढ़ती संख्या शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों पर जाम की स्थिति भी प्रदूषण बढ़ाती है। कई जगह मुख्य सड़कों की सफाई अब भी मशीनों के बजाय झाड़ू से की जाती है। सड़कों पर वाहनों की पार्किंग के कारण लेफ्ट क्लियरेंस नहीं मिल पाता और वाहन रुक-रुककर चलते हैं। इससे भी प्रदूषण बढ़ता है।

भोपाल नगर निगम का दावा- राशि का इस्तेमाल हुआ

भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि वायु प्रदूषण कम करने के सिस्टम को विकसित करने के लिए जितनी राशि जारी की गई थी उसका इस्तेमाल किया गया है। उनके मुताबिक बिलिंग नहीं होने के कारण खर्च की राशि कम दिखाई दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भोपाल में पिछले साल की तुलना में वायु प्रदूषण कम हुआ है।

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भोपाल की हवा पर NGT ने भी मांगा पूरा हिसाब

भोपाल में वायु गुणवत्ता और पर्यावरण सुधार पर खर्च हुई राशि का हिसाब अब NGT ने भी मांगा है। NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने भोपाल की वायु गुणवत्ता और पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़े मामले में भोपाल नगर निगम और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 2019 से अगस्त 2026 तक की एयर क्वालिटी का महीनेवार रिकॉर्ड और आंकड़े पेश करने होंगे। वहीं नगर निगम को पर्यावरणीय निधि से जुड़ी राशि का पूरा विवरण देना होगा।

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20 अगस्त को हुई मामले की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई 20 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। पीठ ने OA नंबर 192/2025 (CZ), राशिद नूर खान बनाम मध्यप्रदेश शासन व अन्य और OA नंबर 181/2025 (CZ), भोपाल सिटीजन फोरम बनाम मध्यप्रदेश शासन व अन्य मामलों की सुनवाई की। अब एक तरफ NCAP के तहत मिली राशि के इस्तेमाल और प्रदूषण नियंत्रण के परिणाम पर सवाल हैं, वहीं दूसरी तरफ NGT की रिपोर्ट तलब किए जाने से भोपाल में वायु गुणवत्ता सुधार के दावों और खर्च का आधिकारिक हिसाब भी सामने आने की उम्मीद है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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