शाजापुर से 45 काले हिरणों को पकड़ा और गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा, हेलीकॉप्टर से लगाया गया हांका

शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों की मदद से पकड़े गए 45 काले हिरणों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान सोमवार सुबह जिले के इमलीखेड़ा गांव में चलाया गया।
दक्षिण अफ्रीका की टीम की मदद से हुआ अभियान
शाजापुर के जिलाधिकारी रिजु बाफना ने मंगलवार को जानकारी दी कि दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञों और मध्यप्रदेश वन विभाग की संयुक्त टीम ने यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने बताया, हमने दक्षिण अफ्रीका की तकनीक की मदद से हेलीकॉप्टर का उपयोग करते हुए 45 काले हिरणों को बिना किसी नुकसान के पकड़ा और उन्हें गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा।
जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा है लक्ष्य
अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में नीलगाय और काले हिरण जैसे जंगली जानवरों से किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना है। ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से किसान इन जानवरों से परेशान थे। अधिकारियों ने बताया कि यह पूरा अभियान केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अनुमति और राज्य सरकार की सहमति से चलाया जा रहा है।
पहली बार साउथ अफ्रीकी तकनीक से हिरणों को पकड़ा
अधिकारियों के मुताबिक, यह पहला मौका है जब मध्यप्रदेश में दक्षिण अफ्रीका की तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से इतने बड़े पैमाने पर काले हिरणों को पकड़ा गया है। इस दौरान किसी भी हिरण को चोट न पहुंचे, इसके लिए विशेष ट्रैपिंग नेट, ड्रग डार्ट्स और हेलीकॉप्टर सर्विलांस का इस्तेमाल किया गया।
6 स्थानों पर हिरण व 4 स्थानों पर नीलगाय को पकड़ा
जिले में काले हिरणों को पकड़ने के लिए कुल 6 जगहों को चुना गया। जिसमें शुजालपुर के गवाड़ी और नया समाजखेड़ा गांव, कालापीपल के इमलीखेड़ा, उमरसिंगी, अरनियाकलां और डुंगल क्षेत्र।
वहीं नीलगायों को पकड़ने के लिए शाजापुर के लाहौरी बलदा और गोपीपुर, शुजालपुर के मदाना, और सुसनेर के निपान्या करजू गांवों में अभियान चलाया गया।
किसानों में राहत की उम्मीद
अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष अभियान के तहत कुल 100 नीलगाय और 400 काले हिरणों को पकड़कर गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और राज्य के अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। अभियान के सफल संचालन से किसानों में राहत की उम्मीद बढ़ी है और यह पहल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।












