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What is Chaturmas : जब भगवान विष्णु 4 महीने सोने चले जाते हैं

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What is Chaturmas : जब भगवान विष्णु 4 महीने सोने चले जाते हैं
धर्म डेस्क। चातुर्मास यानी के चार महीने की वह पवित्र अवधि, जब भगवान विष्‍णु 4 महीने की योग निद्रा में चले जाते हैं। चातुर्मास का आरंभ देवशयनी एकादशी से होता है। श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक बीतने के बाद देवउठनी एकादशी के दिन से भगवान विष्‍णु और सभी देवतागण जागृत होकर अपना-अपना कार्य संभालते हैं। इस अवधि में सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। इसलिए सावन के महीने में शिवजी की पूजा करने का खास महत्‍व होता है। यह समय भारत में वर्षा ऋतु का होता है। जानें पूरी कहानी... शास्त्रों में कहा गया है कि चतुर्मास में इधर उधर घूमने की जगह  एक जगह स्थिर रहें। इसका कारण यही है कि बारिश के समय धरती पर पड़ा हर बीज अंकुरित होता है। चलने फिरने से ये बीज दबकर नष्ट हो जाते हैं और पेड़ों की नवीन ऋंखला तैयार नहीं हो पाती, चलने से जीव जंतुओं को नुकसान होता है और बिलों से बाहर निकलने के बाद ये हमें भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए एक जगह स्थिर हो जाने से किसीको हानि नहीं होती।श्रीमदभागवत पुराण भी कहती है कि - हिंसा कायाद्य नीहया यानि हिंसा पर विजय पाना चाहते हैं तो शरीर के प्रयासों को कम करें...

चातुर्मास में न करें ये मांगलिक कार्य

चातुर्मास के 4 महीनों में मुंडन, जनेऊ, गृहप्रवेश, नया काम और विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। देवउठनी एकादशी के दिन से ये सभी शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं। इन 4 महीनो में मांस, मदिरा, नशा, भारी और तामसिक भोजन का त्‍याग कर देना चाहिए। इस दौरान नए कार्य की शुरुआत करने पर उसमें सफलता नहीं मिलती है।

चातुर्मास का महत्‍व

चातुर्मास में पूजापाठ, ध्यान, उपवास, तप पवित्र नदियों में स्नान और धार्मिक कार्यों का बहुत महत्‍व होता है। इस समय भागवत कथा सुनने का महात्‍मय बहुत अधिक है। इस दौरान घरों में भजन कीर्तन और पाठ करवाना चाहिए। इससे घर से हर प्रकार की नकारात्‍मकता और अपवित्रता दूर होकर भगवान की कृपा प्राप्‍त होती है। इस दौरान साधक कोई व्रत लेते हैं चाहे वो किसी प्रिय वस्तु का त्याग हो, मौन व्रत हो या एक समय भोजन या कुछ और इस दौरान कई लोग दाढ़ी, मूछ और बाल नहीं कटवाते। इन महीनों में हमारी पाचन शक्ति कमजोर रहती है। पानी में बैक्टीरिया और फल, सब्जी, अन्न में कीटाणु बढ़ जाते हैं। इनका सेवन करने से शरीर भी रोगी होता है, इसलिए ऐसे नियम बने गए हैं कि व्रत अधिक होते हैं।

चातुर्मास में दान पुण्‍य

पद्म पुराण में चतुर्मास के दौरान जरूरतमंद लोगों को दान करने का विशेष महत्‍व बताया गया है। इन चार महीने के दौरान जरूरतमंदों को चप्पल, छाता, कपड़े, अन्न-धन, फल, कपूर और पूजा की सामग्री दान करना चाहिए। माना जाता है कि इस समय दान धर्म से मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती हैं और किसी प्रकार की धन की कमी नहीं होने देती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस समय देवता स्वयं तप करते हैं और उनकी शांति भंग करनेवाली गतिविधि नकारात्मक परिणाम देती हैं। यह जीवन को नए तरीके से शुरु करने का समय है..और ईश्वर के गुणगान और ध्यान से जीवन में नई उर्जा का संचार होता है। वीडियो में सुनें पूरी कहानी... https://www.youtube.com/watch?v=U6oQTzRw4_U&t=19s ये भी पढ़ें- Horoscope of The Week : जानिए कैसा रहने वाला है इस हफ्ते आपका भविष्य
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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