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West Bengal Politics :TMC घर बचाने के लिए कर रही जतन, सभी कमेटियां-प्रमुख संगठन भंग किए

विधानसभा चुनाव में हार के बाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपना घर बचाने के लिए कई जतन कर रही है। पार्टी में बड़ी फूट की आशंका को देखते हुए पार्टी की सभी समितियों को प्रमुख संगठन (फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन) भंग कर दिए हैं।
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TMC घर बचाने के लिए कर रही जतन, सभी कमेटियां-प्रमुख संगठन भंग किए
फाइल फोटो

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए पार्टी की सभी कमेटियों और उससे जुड़े अनुषांगिक संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अब पूरे संगठन का नए सिरे से पुनर्गठन किया जाएगा।

आत्ममंथन और समीक्षा  

तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है। पार्टी के अनुसार पश्चिम बंगाल में कार्यरत सभी संगठनात्मक समितियां और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन अब भंग माने जाएंगे। इसके साथ ही संगठन के हर स्तर पर आत्ममंथन, कार्य-निष्पादन की समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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नई संरचना के साथ होगा पुनर्गठन 

पार्टी नेतृत्व का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्य संगठन और उससे जुड़े सभी मोर्चों की नई संरचना तैयार की जाएगी। पुनर्गठन की घोषणा उचित समय पर की जाएगी। TMC का दावा है कि यह कदम संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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हार के बाद बढ़ी चुनौतियां 

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनावी हार के बाद पार्टी को आंतरिक असंतोष और गुटबाजी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ अनुषांगिक संगठनों द्वारा शीर्ष नेतृत्व के निर्णयों से अलग रुख अपनाने की खबरें भी सामने आई हैं। ऐसे में संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह बदलने का फैसला नेतृत्व की रणनीतिक पहल माना जा रहा है।

16 फ्रंटल संगठनों पर भी असर 

तृणमूल कांग्रेस के लगभग 16 फ्रंटल संगठन हैं, जो युवाओं, महिलाओं, छात्रों, श्रमिकों और समाज के विभिन्न वर्गों को पार्टी से जोड़ने का काम करते हैं। इसके अलावा पार्टी की कोर कमेटी, स्टेट कमेटी, जिला और ब्लॉक कमेटियां तथा अनुशासन समिति भी संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा थीं। अब इन सभी इकाइयों को समाप्त कर नए सिरे से गठन की तैयारी की जा रही है।

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राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में बड़ा संकेत 

हालांकि पार्टी ने इस फैसले के पीछे के कारणों का विस्तृत खुलासा नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संगठन पर नेतृत्व की पकड़ मजबूत करने और मौजूदा संकट से उबरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। TMC के गठन के बाद इसे पार्टी के सबसे बड़े संगठनात्मक बदलावों में से एक माना जा रहा है। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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