Bhadli Navami 2026:22 या 23 जुलाई कब मनाई जाएगी भड़ली नवमी? नए काम शुरू करने का सबसे शुभ दिन, बिना मुहूर्त भी मिलती है सफलता

धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में शुभ कार्यों के लिए सही मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। शादी-विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत या किसी नई संपत्ति की खरीद जैसे मांगलिक कार्य आमतौर पर शुभ तिथि और ग्रह-नक्षत्र देखकर किए जाते हैं। लेकिन साल में एक ऐसी तिथि भी आती है, जब किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती। इस विशेष तिथि को भड़ली नवमी या भडल्या नवमी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन स्वयं ही शुभ योग बनते हैं, इसलिए इसे स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है। साल 2026 में भड़ली नवमी को लेकर लोगों के मन में यह सवाल है कि यह 22 जुलाई को मनाई जाएगी या 23 जुलाई को? आइए जानते हैं इसकी सही तिथि, शुभ समय, धार्मिक महत्व और इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्यों के बारे में।
भड़ली नवमी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि इस प्रकार रहेगी
नवमी तिथि प्रारंभ: 22 जुलाई 2026, सुबह 5:16 बजे
नवमी तिथि समाप्त: 23 जुलाई 2026, सुबह 7:03 बजे
उदयातिथि के आधार पर भड़ली नवमी का पर्व 22 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इसी दिन शुभ और मांगलिक कार्य करना सबसे उत्तम माना गया है।
यह भी पढ़ें: बेल पत्र का पौधा नहीं हो रहा घना? सावन से पहले अपनाएं ये आसान तरीका, तेजी से आएंगी नई पत्तियां
क्यों खास होती है भड़ली नवमी?
भड़ली नवमी को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ तिथि माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त होती है। यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से पंचांग देखने या ज्योतिषीय गणना कराने की आवश्यकता नहीं होती। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों में सफलता, सुख-समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि जिन लोगों के विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य लंबे समय से शुभ मुहूर्त के इंतजार में रुके होते हैं, वे भड़ली नवमी का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
चातुर्मास से पहले आखिरी बड़ा शुभ अवसर
भड़ली नवमी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके कुछ दिनों बाद 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। ऐसे में भड़ली नवमी को चातुर्मास शुरू होने से पहले शुभ कार्यों के लिए अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इसलिए इस दिन विवाह समारोह, नए व्यवसाय की शुरुआत और गृह प्रवेश जैसे कार्यक्रम बड़ी संख्या में आयोजित किए जाते हैं।
भड़ली नवमी पर कौन-कौन से शुभ कार्य किए जा सकते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बिना अलग मुहूर्त देखे कई शुभ कार्य किए जा सकते हैं, जैसे-
- विवाह और सगाई
- गृह प्रवेश
- नया व्यापार, दुकान या ऑफिस शुरू करना
- वाहन, मकान, जमीन या संपत्ति खरीदना
- नए निवेश या महत्वपूर्ण आर्थिक कार्य
- परिवार में शुभ आयोजन
- हवन, यज्ञ और कलश स्थापना
- पूजा-पाठ और व्रत
- मुंडन, जनेऊ जैसे धार्मिक संस्कार
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान-पुण्य
भड़ली नवमी पर पूजा का महत्व
भड़ली नवमी के दिन माता पार्वती और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख, परिवार में समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक उन्नति और शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन दान-पुण्य, हवन और धार्मिक अनुष्ठान करने से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
यह भी पढ़ें: Sawan 2026: 30 जुलाई या 1 अगस्त कब से शुरू होंगे सावन? जाने पहले सोमवार की तीथि और इस दिन का महत्व
क्या भड़ली नवमी पर मुहूर्त देखने की जरूरत होती है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नहीं। भड़ली नवमी को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। इसका अर्थ है कि इस दिन शुभ कार्यों के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि यदि किसी परिवार की विशेष धार्मिक परंपरा या व्यक्तिगत ज्योतिषीय कारण हों, तो वे अपने कुलाचार या विद्वान आचार्य की सलाह भी ले सकते हैं।
भड़ली नवमी 2026 का महत्व
भड़ली नवमी केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि शुभ कार्यों की शुरुआत का विशेष अवसर मानी जाती है। अगर आपके घर में विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, संपत्ति खरीदने या किसी नए कार्य की शुरुआत लंबे समय से टल रही है, तो 22 जुलाई 2026 का दिन बेहद शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा, सकारात्मक सोच और ईश्वर का स्मरण करके शुरू किया गया हर शुभ कार्य सफलता, समृद्धि और मंगल का मार्ग प्रशस्त करता है।











