Warwick University की बड़ी खोज: white dwarf star की राख से बना दुर्लभ दूसरी-पीढ़ी का ग्रह मिला

लंदन। इंग्लैंड की वारविक यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में खगोलविदों की एक टीम ने एक दुर्लभ सेकेंड-जेनरेशन ग्रह की खोज की है, जो अपने ही जन्मदाता श्वेत बौने तारे (White Dwarf) के अवशेषों की परिक्रमा कर रहा है। श्वेत बौने तारे, दरअसल किसी तारे के ईंधन खत्म होने के बाद बचा हुआ उसका मृत कोर होता है। ये अपने आसपास मौजूद ग्रहों के मटेरियल को अपनी ओर खींच लेते हैं, जिसे उनके एटमॉस्फियर में डिटेक्ट किया जा सकता है। यह केमिकल सिग्नेचर खगोलविदों को ऑर्बिट कर रहे ग्रहों के बारे में डिटेल जानकारी देता है और यह सिग्नेचर आमतौर पर सिलिकॉन और आयरन जैसे चट्टान बनाने वाले तत्वों से भरा होता है। हालांकि पहले पल्सर के आसपास ऐसे 'पुनर्जन्म' वाले ग्रहों के होने का शक था। लेकिन, नई खोज इस बात की पुष्टि करती है कि श्वेत बौने तारे के चारों ओर भी सेकेंड-जेनरेशन ग्रह बन सकते हैं।
पुराने तारे से बनते हैं सेकंड जनरेशन स्टार
इस स्टडी के प्रथम लेखक और वारविक विश्वविद्यालय के फिजिक्स विभाग के पीएचडी छात्र जेमी विलियम्स ने कहा- सेकेंड-जेनरेशन ग्रह वे होते हैं जो किसी तारे की मृत्यु के बाद उसके छोड़े गए मटेरियल से बनते हैं। ये बेहद दुर्लभ हैं और एक श्वेत बौने तारे के आसपास ऐसे ग्रह का मिलना पूरी तरह अनएक्सपेक्टेड था। यह ऐसा ही है जैसे उसी तारे की राख से उठे किसी ग्रह को खोजना जिसकी वह कभी परिक्रमा करता था। नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित और यूरोपीय अनुसंधान परिषद (ERC) द्वारा फंडेड इस रिसर्च में श्वेत बौने तारे HS 0209+0832 पर फोकस किया गया है, जिसके वायुमंडल में एक असामान्य केमिकल फीचर पाया गया है।
तारे के अवशेष से बना ग्रह
वारविक विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर और ईआरसी ग्रांट प्राप्तकर्ता बोरिस गैंसिके ने कहा, "HS 0209+0832 के आसपास मिले ग्रह के बारे में सबसे खास बात यह है कि यह न तो कहीं और से आया है और न ही इस सिस्टम के बनने के समय का कोई बचा हुआ हिस्सा है। ऐसा लगता है कि यह उसी मटेरियल से बना है जिसे इसके अपने तारे ने अपनी मृत्यु के दौरान छोड़ा था। एक तरह से इस सिस्टम ने खुद ही एक अनोखे ग्रह को जन्म दिया है।
पुनर्जन्म वाले ग्रहों को ढूंढने का एक नया तरीका खुलेगा
यदि इसकी पुष्टि हो जाती है, तो HS 0209+0832 सेकेंड-जेनरेशन ग्रह की मेजबानी करने वाला पहला श्वेत बौना तारा (White Dwarf) बन जाएगा। इससे अन्य मृत तारों की रोशनी में इसी तरह के कार्बन और भारी तत्वों के सिग्नेचर को खोजकर ऐसे ही पुनर्जन्म वाले ग्रहों को ढूंढने का एक नया तरीका खुल जाएगा। विस्कॉन्सिन-मैडिसन यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोनॉमी डिपार्टमेंट के डॉ. निकोलस स्टोन ने कहा, एलिमेंट्स का यह पैटर्न का साफ संकेत है कि यह एक न्यूक्लियर रिएक्शन है और मरते हुए तारों के विशाल रेड जायंट फेज के दौरान उनके अंदर भारी तत्वों का निर्माण करती है। यह एक ऐसा केमिकल सिग्नेचर है जो किसी भी सामान्य 'फर्स्ट-जेनरेशन' ग्रह में नहीं होना चाहिए, जिससे हमें पता चला कि यह नया ग्रह कुछ अलग है। टीम का मानना है कि सबसे संभावित व्याख्या यह है कि श्वेत बौना तारा HS 0209+0832, एक नए बने सेकेंड-जेनरेशन विशाल ग्रह से एनर्जी ले रहा है - यह एक ऐसा ग्रह है जो तारे की मृत्यु के दौरान बने मटेरियल की नई डिस्क से बना है।




















