CG NEWS :स्कूल खुलते ही फेल हुआ VSK ऐप! ई-अटेंडेंस पर शिक्षकों का बवाल, निजता पर हमले का आरोप

RAIPUR NEWS। प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के पहले ही दिन शिक्षा विभाग की डिजिटल व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई। सरकारी स्कूल खुलते ही विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप का सर्वर ठप हो गया, जिससे प्रदेशभर में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो सकी। इस बीच शालेय शिक्षक संघ ने निजी मोबाइल में ऐप डाउनलोड कराने को शिक्षकों की निजता पर हमला बताते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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पहले ही दिन धड़ाम हुई डिजिटल व्यवस्था
गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार से प्रदेश के स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हुई, लेकिन शिक्षा विभाग की बहुप्रचारित ई-अटेंडेंस प्रणाली पहले ही दिन लड़खड़ा गई। VSK ऐप का सर्वर अचानक ठप होने से हजारों शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। कई जिलों से तकनीकी गड़बड़ी और लॉगिन फेल होने की शिकायतें सामने आईं।
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'निजी मोबाइल पर सरकारी दबाव स्वीकार नहीं'
शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों को निजी मोबाइल में VSK ऐप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने पर कैमरा, लोकेशन, डेटा और अन्य निजी जानकारियों तक पहुंच की अनुमति देनी पड़ती है, जिससे शिक्षकों और उनके परिवारों की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।
डेटा लीक और AI युग में बढ़ी चिंता
संघ का कहना है कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, डेटा चोरी, डीपफेक और AI आधारित धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में निजी मोबाइल फोन पर सरकारी ऐप को अनिवार्य बनाना सुरक्षा और गोपनीयता दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। संगठन ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
क्या विभाग को अपने अधिकारियों पर भरोसा नहीं?
संघ के महासचिव धर्मेश शर्मा ने सवाल उठाया कि जब विभाग में सीएसी, संकुल प्राचार्य, संस्थाप्रमुख, बीआरसीसी, एबीईओ और बीईओ जैसे अधिकारी मौजूद हैं, तो फिर ऐप आधारित निगरानी की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने इसे विभागीय तंत्र पर अविश्वास का संकेत बताया।
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नेटवर्क नहीं, फिर कैसे लगेगी ऑनलाइन हाजिरी?
शिक्षक नेताओं का कहना है कि वनांचल और दूरस्थ इलाकों में आज भी मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या बनी हुई है। कई स्कूल ऐसे क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं जहां इंटरनेट और मोबाइल सिग्नल नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नेटवर्क आधारित उपस्थिति प्रणाली को व्यवहारिक नहीं माना जा सकता।
पढ़ाई छोड़ ऑनलाइन काम में उलझ रहे शिक्षक
शिक्षक संघ ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा सुधार की बात तो करती है, लेकिन लगातार बढ़ते ऑनलाइन और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ शिक्षकों पर डाला जा रहा है। इससे उनका अधिक समय प्रशासनिक प्रक्रियाओं में खर्च हो रहा है और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सरकार से ई-अटेंडेंस व्यवस्था वापस लेने की मांग
शिक्षक संघ ने मांग की है कि VSK ऐप आधारित ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। निजी मोबाइल का उपयोग अनिवार्य बनाने की नीति समाप्त की जाए और शिक्षकों को केवल शैक्षणिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया जाए।












