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Peoples Update Special :ग्रामीण नलजल व्यवस्था के लिए नए नियम लागू, अब पानी का बिल नहीं भरने पर ग्राम पंचायत काट सकेगी कनेक्शन

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण नलजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। नए नियमों के तहत अब पंचायतें जल प्रभार (यूजर चार्ज) तय करेंगी और हर महीने पानी का बिल जारी करेंगी। तीन महीने तक शुल्क जमा नहीं करने वालों का कनेक्शन काटने से लेकर जल गुणवत्ता की जांच तक की जिम्मेदारी भी पंचायतों को दी गई है।
ग्रामीण नलजल व्यवस्था के लिए नए नियम लागू, अब पानी का बिल नहीं भरने पर ग्राम पंचायत काट सकेगी कनेक्शन
ग्रामीण नलजल व्यवस्था के लिए नए नियम लागू

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। प्रदेश में मप्र पंचायत (ग्रामीण नलजल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन) नियम, 2026 लागू कर दिए गए हैं। पंचायतें नई पाइपलाइन, मरम्मत, जल विवाद और जल गुणवत्ता की निगरानी भी करेंगी। पानी की चोरी और अवैध कनेक्शन पर कार्रवाई के साथ जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था को आत्मनिर्भर, जवाबदेह और टिकाऊ बनाना है।

ग्राम पंचायतों को मिली नई जिम्मेदारियां

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण नलजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंप दी है। पंचायतें अब जल प्रभार तय करेंगी, हर महीने बिल जारी करेंगी और तीन माह तक शुल्क जमा नहीं करने वालों का कनेक्शन काट सकेंगी। पानी की बर्बादी पर जुर्माना लगाने से लेकर नई पाइपलाइन, मरम्मत और विवाद निपटारे तक की व्यवस्था भी ग्राम पंचायतों के माध्यम से संचालित होगी। वहीं जल गुणवत्ता की नियमित जांच भी करानी होगी।

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सरकार का उद्देश्य और सख्त प्रावधान

सरकार का उद्देश्य नलजल योजनाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और टिकाऊ बनाना है। अभी तक जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। पंचायतें पेयजल स्रोतों से अवैध जल दोहन, पानी की चोरी, अवैध कनेक्शन और जल संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सकेंगी। जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी पंचायतें करेंगी।

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नए नियमों में पंचायतों को मिले ये अधिकार

नए नियमों के तहत नए कनेक्शन, मरम्मत और विस्तार कार्य पंचायतों की निगरानी में होंगे। वॉल्व-मैन और पंप ऑपरेटर की नियुक्ति और उनका भुगतान भी ग्राम पंचायत करेगी। पेयजल विवादों का अंतिम निर्णय ग्राम पंचायत करेगी। हर माह जल प्रभार का बिल जारी होगा और पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से शुल्क की वसूली की जाएगी।

ग्रामीणों और सरपंच ने रखी अपनी बात

ग्राम मोहासा, जिला सागर के शशिभूषण सिंह का कहना है कि नियमित और पर्याप्त पानी मिले तो जल प्रभार देने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पहले पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार जरूरी है। वहीं मरदानपुर, जिला सागर के सरपंच चरण सिंह यादव ने कहा कि गांव के कई लोग तीन-तीन माह से पानी का बिल नहीं दे रहे हैं। जितनी वसूली नहीं होती, उससे ज्यादा वसूली करने वाले को मानदेय देना पड़ रहा है। अब पंचायत सख्ती से शुल्क वसूली करेगी।

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जल जीवन निगम ने बताई नई व्यवस्था

जल जीवन निगम के प्रबंध संचालक केवीएस चौधरी ने बताया कि ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध सभी मद से योजनाओं के संचालन और संधारण के लिए राशि खर्च करने की अनुमति दी गई है। हर माह 10 हजार रुपए तक बिना तकनीकी स्वीकृति खर्च करने की भी अनुमति होगी, ताकि आकस्मिक मरम्मत तुरंत कराई जा सके और ग्रामीणों को निर्बाध पेयजल आपूर्ति मिलती रहे। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से पंचायतें स्थानीय स्तर पर योजनाओं का बेहतर संचालन कर सकेंगी।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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