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भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री पारस जैन का निधन:भाजपा संगठन, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर

उज्जैन उत्तर से कई बार रहे विधायक, मध्यप्रदेश सरकार में वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य एवं ऊर्जा जैसे अहम विभागों के मंत्री रहे; भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर
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भाजपा संगठन, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर
फाइल फोटो

 उज्जैन। मध्यप्रदेश की राजनीति के वरिष्ठ चेहरों में शामिल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री पारस जैन का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से भाजपा संगठन, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय तक उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले पारस जैन प्रदेश की राजनीति में एक सशक्त और जनाधार वाले नेता के रूप में पहचाने जाते थे। उनके निधन पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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पारस जैन का राजनीतिक जीवन चार दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहा। वे कई बार उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और अपने कार्यकाल के दौरान संगठन और सरकार, दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे जनता के बीच सहज व्यवहार, सादगी और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए जाने जाते थे।

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मध्यप्रदेश सरकार में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2005 से 2013 के बीच वे राज्य मंत्री के रूप में वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे विभागों से जुड़े रहे। इसके बाद दिसंबर 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2016 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। मंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने उज्जैन उत्तर सीट से उन्हें टिकट नहीं दिया था। इसके बावजूद उन्होंने संगठन से दूरी नहीं बनाई और लगातार पार्टी के कार्यक्रमों, बैठकों और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय बने रहे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में उनकी अलग पहचान थी और कार्यकर्ताओं के बीच उनका विशेष सम्मान था।

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उनके निधन की सूचना मिलते ही भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का उनके निवास पर पहुंचना शुरू हो गया। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनके निधन को प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने शोक संदेश साझा कर उनके सार्वजनिक जीवन और जनसेवा को याद किया।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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