Peoples Update Special :शादी के शोर और ट्रैफिक जाम से बिगड़ी मां की तबीयत: बेटी ने NGT में लगाई गुहार, कहा- शांतिपूर्ण जीवन भी मौलिक अधिकार

संतोष चौधरी, भोपाल। शादी समारोहों में तेज डीजे, देर रात तक बजने वाले लाउडस्पीकर और ट्रैफिक जाम से परेशान एक बेटी ने अपनी बीमार मां के अधिकारों की लड़ाई अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक पहुंचा दी है। मामला इटारसी के एक आवासीय इलाके का है, जहां विवाह गार्डन में होने वाले कार्यक्रमों के शोर और अव्यवस्था के कारण एक बुजुर्ग महिला को समय पर इलाज नहीं मिल सका। अब इस मामले में एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब तलब किया है।
बीमार मां के इलाज में हुई देरी, NGT पहुंची बेटी
इटारसी कॉलोनी निवासी सुवर्णा चौधरी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर बताया कि उनके घर के पास स्थित वृंदावन गार्डन और कम्युनिटी हॉल में देर रात तक तेज आवाज में डीजे, ऑर्केस्ट्रा और आतिशबाजी होती है। इससे न केवल ध्वनि प्रदूषण फैलता है बल्कि भारी ट्रैफिक जाम भी लग जाता है। सुवर्णा चौधरी के अनुसार 8 फरवरी की रात विवाह समारोह के दौरान तेज संगीत, भीड़ और सड़क पर लगे जाम के कारण उनकी वृद्ध और बीमार मां को समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। उन्होंने कहा कि यह केवल शोर का मामला नहीं बल्कि नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन, स्वास्थ्य और नींद के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है।
संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
एनजीटी के निर्देश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) और पर्यावरण मंत्रालय की संयुक्त समिति ने स्थल निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट न्यायाधिकरण में प्रस्तुत की थी। हाल ही में हुई सुनवाई में सुवर्णा चौधरी स्वयं एनजीटी में उपस्थित हुईं और समिति की रिपोर्ट पर आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका कहना था कि रिपोर्ट में जमीनी हकीकत को पूरी तरह नहीं दर्शाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि निरीक्षण के बाद भी विवाह गार्डन संचालकों द्वारा देर रात तक डीजे बजाना, ध्वनि प्रदूषण फैलाना और सड़क पर यातायात बाधित करना लगातार जारी है। रिपोर्ट में इन महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं किया गया।
MPPCB से मांगा जवाब
एनजीटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
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NGT की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान एनजीटी की सेंट्रल बेंच ने संविधान के अनुच्छेद-21 का हवाला देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायाधिकरण ने कहा कि-
- शांत, स्वस्थ और प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
- स्वस्थ जीवन और पर्याप्त नींद भी संविधान प्रदत्त अधिकारों का हिस्सा हैं।
- धर्म या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी दूसरे नागरिक पर ध्वनि प्रदूषण नहीं थोपा जा सकता।
- लाउडस्पीकर या डीजे बजाना कोई मौलिक अधिकार नहीं है।
- एनजीटी ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का भी उल्लेख किया।
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मामले में दो सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता पारुल भदौरिया ने कहा कि आवेदिका ने संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने बताया कि बोर्ड ने एनजीटी से आवेदिका की आपत्तियों की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है ताकि बोर्ड तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रख सके। मामले में दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।












