कटनी: 2 दशक से सड़क बदहाल, हर तरफ गड्ढे; पार्षदों ने दी 2 सितंबर से आंदोलन की चेतावनी

कटनी। बरही की इस सड़क का इस्तेमाल ददरा, कनौर और जाजागढ़ की माइंस और क्रशर प्लांट से गिट्टी परिवहन के लिए होता है। गिट्टी परिवहन से मिलने वाला 10 फीसदी राजस्व डीएमएफ फंड में जमा होता है, जो हर वर्ष करोड़ों रुपए बताया जा रहा है। इसके बावजूद सड़क के स्थायी निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं होने से रहवासी परेशान हैं। अब कलेक्टर के नाम दिए गए ज्ञापन में एक सप्ताह में समस्या का निदान नहीं होने पर 2 सितंबर से धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।
2 दशक से सड़क की हालत बदहाल
नगर परिषद बरही के छिदिया-हीरापुर क्षेत्र के रहवासी पिछले 2 दशक से सड़क की बदहाली का दंश झेल रहे हैं। बारिश आते ही सड़क बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाती है और इन गड्ढों में भरा गंदा पानी देखकर ऐसा लगता है मानो सड़क नहीं, बल्कि तालाब बन गया हो। कीचड़, गंदगी और मच्छरों के बीच रहवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। राहगीरों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को इस सड़क से निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई जगह सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। वहीं गर्मी में कीचड़ सूखते ही यही सड़क धूल का मैदान बन जाती है और लोगों को धूल के गुब्बार के बीच आवाजाही करनी पड़ती है।

नगर परिषद अध्यक्ष ने कलेक्टर को लिखा पत्र
सड़क की लगातार खराब होती स्थिति को लेकर अब नगर परिषद अध्यक्ष ने कलेक्टर को पत्र लिखकर गड्ढों में तब्दील सड़क का निर्माण कराने की मांग की है। वहीं परिषद के उपाध्यक्ष मोहन सिंह, पार्षद संतोष द्विवेदी, परिषद के निर्माण प्रभारी पार्षद ईकबाल पवार, पार्षद पति श्रवण सोनी और पार्षद हीरालाल महतेल भी सड़क की समस्या को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं। कलेक्टर के नाम तहसीलदार और टीआई को दिए गए ज्ञापन में एक सप्ताह के भीतर समस्या का निदान नहीं होने पर आंदोलन की बात कही गई है। आंदोलन के लिए 2 सितंबर की तारीख भी मुकर्रर की गई है। क्षेत्र के पार्षद रहवासियों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। अब अध्यक्ष की गुहार और पार्षदों की धमकी का असर क्या होता है, यह आने वाला समय ही बताएगा।
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माइंस और क्रशर से करोड़ों का डीएमएफ फंड
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ददरा, कनौर और जाजागढ़ में संचालित माइंस और क्रशर प्लांट से गिट्टी का परिवहन इसी मार्ग से होता है। गिट्टी परिवहन से मिलने वाले राजस्व का 10 फीसदी डीएमएफ फंड में जमा होता है, जो हर वर्ष करोड़ों रुपए बताया जा रहा है। बावजूद इसके जिला प्रशासन द्वारा यहां की बुनियादी सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया गया है। जबकि डीएमएफ फंड के उपयोग का प्रावधान प्रभावित क्षेत्र और स्थानीय स्तर पर करने का है। क्रशर प्लांटों से भारी वाहनों के जरिए गिट्टी का परिवहन इसी मार्ग से किया जा रहा है और भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क की हालत लगातार खराब होती जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि खनिज संचालकों से ली जा रही रॉयल्टी और डीएमएफ फंड का उपयोग आखिर इस सड़क के स्थायी निर्माण में क्यों नहीं किया जा रहा है।
रहवासियों को आवागमन में हो रही परेशानी
खस्ताहाल सड़क की मरम्मत यहां के माइंस संचालकों द्वारा लंबे अरसे से की जा रही है और प्रशासन भी उन्हीं पर सड़क मरम्मत कराने का दबाव डालता रहा है। जबकि सड़क निर्माण की वास्तविक जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है। हर वर्ष वर्षा ऋतु में सड़क की बदहाली को लेकर मांग उठती है, इसके बाद माइंस संचालकों पर दबाव बनाकर गड्ढे भरने का काम शुरू हो जाता है। बरसात में गड्ढे और कीचड़ तो गर्मी में धूल के गुब्बार यहां के रहवासियों की परेशानी बढ़ाते हैं। हर साल चेतावनी और धरना-प्रदर्शन की बात सामने आती है, लेकिन इसके बाद भी स्थायी समाधान नहीं हो पाता। सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपए के डीएमएफ फंड का उपयोग कर इस सड़क के स्थायी निर्माण के प्रयास आखिर क्यों नहीं किए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस बार की धमकी और चेतावनी सिर्फ ज्ञापन तक सीमित रहती है या नगर के जिम्मेदार कोई ठोस कदम उठाते हैं।




















