रातापानी जंगल कटाई मामले में NGT सख्त, MPPCB ने मांगा तीन सप्ताह का समय

रातापानी टाइगर रिजर्व के आसपास हजारों पेड़ों की कटाई और भारी मशीनों से जमीन समतलीकरण के मामले में NGT ने संज्ञान लिया है। MPPCB ने जवाब के लिए समय मांगा।
रातापानी जंगल कटाई मामले में NGT सख्त, MPPCB ने मांगा तीन सप्ताह का समय
रातापानी में पेड़ों की कटाई और जमीन खुदाई का मामला

भोपाल। राजधानी से सटे रातापानी टाइगर रिजर्व के आसपास जंगल में कथित तौर पर हजारों पेड़ों की कटाई और भारी मशीनों से जमीन की खुदाई के मामले में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। मामले में MPPCB ने तीन सप्ताह का समय मांगा है जबकि राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि उसका जवाब तैयार है और इसे दो सप्ताह के भीतर दाखिल कर दिया जाएगा। रातापानी टाइगर रिजर्व के आसपास जंगल में पेड़ों की कटाई और जमीन को भारी मशीनों से समतल किए जाने की शिकायत को NGT ने गंभीरता से लिया है। मामले में जंगल और पर्यावरण से जुड़े नियमों के पालन के साथ-साथ जमीन के उपयोग और उसके हस्तांतरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

हजारों पेड़ों की कटाई और भारी मशीनों से खुदाई के आरोप

NGT के समक्ष रखी गई शिकायत में रातापानी टाइगर रिजर्व के आसपास जंगल में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक सागौन समेत कई कीमती पेड़ों को काटे जाने के साथ ही भारी मशीनों का इस्तेमाल कर जमीन की खुदाई और समतलीकरण किया गया। आरोप है कि क्षेत्र में रिसॉर्ट निर्माण की तैयारी के लिए JCB और पोकलेन मशीनों के जरिए जमीन को समतल किया गया। इस पूरे मामले में पर्यावरण और वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

जमीन की खरीद-बिक्री और पंजीयन पर भी सवाल

मामले में सिर्फ पेड़ों की कटाई और जमीन की खुदाई ही नहीं बल्कि संबंधित भूमि की खरीद-बिक्री और उसके पंजीयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। NGT के समक्ष यह मुद्दा भी सामने आया कि यदि संबंधित जमीन वन क्षेत्र या किसी विवादित श्रेणी में आती है, तो उसके हस्तांतरण और पंजीयन की अनुमति किस आधार पर दी गई। ऐसे में भूमि की वास्तविक स्थिति और उसके हस्तांतरण की प्रक्रिया की जांच को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

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पंचायत से अनुमति के बावजूद शर्तों के पालन पर सवाल

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जमीन के समतलीकरण के लिए ग्राम पंचायत से अनुमति ली गई थी लेकिन अनुमति से जुड़ी शर्तों का पालन नहीं किया गया। इस पहलू की भी जांच की जरूरत बताई गई है कि जमीन समतलीकरण की अनुमति किन शर्तों के साथ दी गई थी और मौके पर काम करते समय उन शर्तों का पालन हुआ या नहीं।

NGT ने इन अधिकारियों को बनाया प्रतिवादी

मामले को गंभीरता से लेते हुए NGT ने रायसेन कलेक्टर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, रायसेन DFO और रातापानी टाइगर रिजर्व के अधीक्षक कार्यालय को प्रतिवादी बनाया है। अधिकरण ने संबंधित समिति को मौके का निरीक्षण करने और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। समिति को छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट NGT के समक्ष पेश करने के लिए कहा गया था।

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MPPCB ने मांगा तीन सप्ताह का समय

अब मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए NGT से तीन सप्ताह का समय मांगा है। वहीं राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि उसका जवाब तैयार है और उसे दो सप्ताह के भीतर दाखिल कर दिया जाएगा।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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