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‘आनंदमठ’ पर परिचर्चा :वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर विशेष चर्चा, यंग थिंकर्स फोरम का हुआ आयोजन

स्वर्णा तिवारी ने बताया कि आनंदमठ केवल साहित्यिक कृति ही नहीं, बल्कि उस समय की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक भी है। वहीं चर्चा के दौरान उपन्यास के पात्रों, घटनाओं तथा सन्यासी विद्रोह के ऐतिहासिक महत्व पर भी सार्थक विचार-विमर्श हुआ
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर विशेष चर्चा, यंग थिंकर्स फोरम का हुआ आयोजन
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। यंग थिंकर्स फोरम, भोपाल द्वारा आयोजित पुस्तक चर्चा श्रृंखला के अंतर्गत 104वीं पुस्तक समीक्षा का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर आनंदमठ पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित हुई। कार्यक्रम में पुस्तक की समीक्षा स्वर्णा तिवारी ने प्रस्तुत की। उन्होंने सरल एवं रोचक शैली में उपन्यास की कथा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्वाधीनता संग्राम में इसकी भूमिका को विस्तार से समझाया।

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    150 वर्ष होने पर की गई विशेष चर्चा

    स्वर्णा तिवारी ने आगे बताया कि आनंदमठ केवल साहित्यिक कृति ही नहीं, बल्कि उस समय की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक भी है। चर्चा के दौरान उपन्यास के पात्रों, घटनाओं तथा सन्यासी विद्रोह के ऐतिहासिक महत्व पर भी सार्थक विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर भी विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि यह गीत स्वाधीनता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख उद्घोष रहा।

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    जय पराशर सहित कई साहित्यप्रेमी रहे मौजूद

    समय के साथ कुछ छंदों में परिवर्तन हुए, किन्तु अब भारत सरकार द्वारा मूल छह छंदों को पुनः आधिकारिक रूप से स्वीकार कर गाए जाने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में जय पराशर, कौशिक चतुर्वेदी सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन कर कार्यक्रम का समापन किया।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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