भोपाल। देशभर में संगठन के विस्तार का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पिछले वर्ष जहां 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 55,683 स्थानों और 88,949 शाखाओं तक पहुंच गई है। इस प्रकार एक वर्ष में 3,943 नए स्थान जुड़े हैं और शाखाओं में 5,820 की वृद्धि दर्ज की गई है। संगठन का विस्तार केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक भी इसकी पहुंच बनी है। शताब्दी वर्ष के दौरान यह विस्तार और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया है। यह जानकारी संघ के प्रांत संघचालक अशोक पांडेय ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि संघ हरियाणा के पट्टीकल्याणा (समालखा) में आयोजित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने वार्षिक प्रतिवेदन में यह आंकड़ें साझा किए।
प्रतिवेदन के अनुसार देशभर में अब तक 37,000 से अधिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें लगभग साढ़े तीन करोड़ लोगों ने भाग लिया। ये सम्मेलन शहरी, ग्रामीण, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में आयोजित हुए, जिनका उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा। इन आयोजनों में सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना, कुटुंब प्रबोधन, आत्मबोध और नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया। इन सम्मेलनों ने विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने का कार्य किया।
शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन ने दो प्रमुख लक्ष्यों को सामने रखा गया है। पहला संगठन का विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट करना। इस उद्देश्य से देशभर में गृह संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अब तक कई प्रांतों में लगभग 10 करोड़ घरों और 3.9 लाख गांवों तक संपर्क किया जा चुका है। यह अभियान बिना किसी सामाजिक या सामुदायिक भेदभाव के सभी वर्गों तक पहुंचने का प्रयास है, जिससे संवाद और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिला है।
गृह संपर्क अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने विभिन्न समुदायों के परिवारों से मिलकर संवाद स्थापित किया। उदाहरण के तौर पर, केरल में 55 हजार से ज्यादा मुस्लिम और 54 हजार से ज्यादा ईसाई परिवारों तक भी पहुंच बनाई गई, जहां सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस अभियान का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जोड़ना और आपसी समझ को मजबूत करना है। इसके साथ ही महापुरुषों के कार्यों को जाति और पंथ से ऊपर उठकर अपनाने पर भी जोर दिया गया।
संगठन ने महापुरुषों के योगदान को समाज तक पहुंचाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए। गुरु तेग बहादुर के बलिदान के 350वें वर्ष के अवसर पर हजारों कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लाखों लोगों की भागीदारी रही। इसके अलावा ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी के प्राकट्य वर्ष पर भी विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है, जिससे समाज को प्रेरणा मिल सके।
मध्य भारत प्रांत में 20 दिसंबर 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच 1,569 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिनमें 52 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। इन आयोजनों में प्रभात फेरी, कलश यात्रा, वाहन रैली, मानव श्रृंखला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक जनजागरण किया गया। लगभग 80 हजार स्वयंसेवकों ने 23 हजार से अधिक टोलियां बनाकर 27 लाख से ज्यादा परिवारों से संपर्क किया। साथ ही, समाज के प्रबुद्ध वर्ग के 7,900 से अधिक लोगों से भी संवाद स्थापित किया गया, जिससे संगठनात्मक और बौद्धिक स्तर पर मजबूती देखने को मिली।