केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बड़ा हादसा, पहाड़ से गिरी चट्टान ने ली यात्री की जान; करीब 1,000 लोग फंसे

उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच पहाड़ों पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कई इलाकों में लैंडस्लाइड और पहाड़ों से पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच केदारनाथ यात्रा मार्ग पर रविवार को बड़ा हादसा हो गया। चीरबासा इलाके में पहाड़ से अचानक लगातार पत्थर और चट्टानें गिरने लगीं। इसकी चपेट में आने से एक 65 वर्षीय यात्री की मौत हो गई। हादसे के बाद प्रशासन ने केदारनाथ पैदल यात्रा को फिलहाल रोक दिया है। गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाले यात्रियों और केदारनाथ से वापस लौट रहे यात्रियों की आवाजाही भी रोक दी गई है। प्रशासन की ओर से यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
चीरबासा में अचानक गिरने लगे पत्थर
जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 11:15 बजे केदारनाथ पैदल मार्ग के चीरबासा क्षेत्र में पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरने लगे। देखते ही देखते लगातार चट्टानें और पत्थर नीचे आने लगे। इसी दौरान रास्ते से गुजर रहे एक यात्री इसकी चपेट में आ गया। हादसे में 65 वर्षीय व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। प्रशासन और राहत टीमों को इसकी जानकारी दी गई। चीरबासा क्षेत्र के पास स्थित हेलिपैड के आसपास भी पहाड़ी से पत्थर गिरने की घटना सामने आई है। लगातार पत्थर गिरने के कारण इस पूरे हिस्से को यात्रियों के लिए खतरनाक माना जा रहा है।
करीब 1,000 यात्री रास्ते में फंसे
लैंडस्लाइड और पत्थर गिरने की घटनाओं के बाद केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आवाजाही रोक दी गई है। इसके चलते भीमबली से केदारनाथ के बीच करीब 1,000 यात्री फंस गए हैं। इन यात्रियों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं। लंबे समय तक रास्ता बंद रहने के कारण कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई है। प्रशासन की टीम यात्रियों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की कोशिश की जा रही है। यात्रियों को फिलहाल आगे बढ़ने या पहाड़ी वाले हिस्से से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि रास्ते को सुरक्षित बनाने और खतरे की स्थिति का आकलन करने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू करने को लेकर फैसला लिया जाएगा।
बारिश नहीं, फिर भी बना हुआ है खतरा
खास बात यह है कि जिस समय चीरबासा क्षेत्र में पत्थर गिरने की घटना हुई, उस दौरान इलाके में बारिश नहीं हो रही थी। इसके बावजूद पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरते रहे। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने के बाद जमीन और चट्टानों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कई बार बारिश रुकने के बाद भी लैंडस्लाइड या पत्थर गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। यही वजह है कि प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।
यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील
हादसे के बाद प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें। यात्रा मार्ग पर खतरा बना रहने तक किसी भी तरह की जल्दबाजी यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पैदल मार्ग पर कई संवेदनशील हिस्से हैं। बारिश के मौसम में इन इलाकों में लैंडस्लाइड और पत्थर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और प्रशासन की ओर से जारी अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।
कब शुरू होगी केदारनाथ यात्रा?
फिलहाल गौरीकुंड से केदारनाथ जाने और केदारनाथ से लौटने वाले यात्रियों की आवाजाही रोक दी गई है। यात्रा कब दोबारा शुरू होगी, इसका फैसला मार्ग की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।



















